बैंकिंग सुधार के नाम पर औद्योगिक घरानों को मुनाफा पहुंचा रही मोदी सरकार, भार डाल रही आम उपभोक्ता पर - सी. एच. वैंकटचलम् - Jan Manthan : latest news In Hindi , English
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बैंकिंग सुधार के नाम पर औद्योगिक घरानों को मुनाफा पहुंचा रही मोदी सरकार, भार डाल रही आम उपभोक्ता पर – सी. एच. वैंकटचलम्

जनमंथन, जयपुर। केन्द्र सरकार आर्थिक सुधार के नाम पर देश के बैंक सेक्टर को हाशिये पर ले आई है। यह कहना है ऑल इंडिया बैंक एम्प्लाईज एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव सी. एच. वैंकटचेलम का। राजधानी जयपुर में एसिसोशिन की ओर से सरकार की आर्थिक नीतियों के विरुद्ध आंदोलन का ऐलान करने आए वैंकटचेलम ने बताया कि बैंकों पर निजीकरण हावी हो रहा है जिससे बैंक और कंज्यूमर के बीच विश्वास खत्म हुआ है।
 
उन्होंने बताया कि सरकार ने बैड लोन में सुधार के नाम पर बडे औद्योगिक घरानों पर कार्रवाई की जगह उन्हें बैंकों के प्रति बडे दायित्व के भार से मुक्त कर दिया है। वैंकटचेलम ने कहा कि हमारी सरकार से मांग है कि बैंकों को चूना लगाकर भागने वाले औद्योगिक घरानों पर आपराधिक कार्रवाई की जाए। जबकि सरकार ऐसे डिफॉल्टर्स को सभी रियायतें दे रही है। उन्होंने बताय कि विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकसी, जतिन मेहता जैसे डिफॉल्टर्स और धोखेबाज विदेश भाग गए हैं। सरकार को उन्हें तुरंत भारत लाना चाहिए और सजा दी जानी चाहिए।

सी. एच. वैंकचेलम ने कहा कि दिवालियापन कोड के नाम पर डिफॉल्टर्स को फायदा पहुंचाया जा रहा है। हम वसूली चाहते हैं लेकिन सरकार समाधान क्यों चाहती हैं यह समझ से परे हैं। उन्होंने बताया कि RBI की ओर से दिवालिया घोषित औद्योगिक घरानों को अन्य कॉरोपेरेट घरानों को बेचा जा रहा है। आलोक इंडस्ट्रीज पर 30 हजार करोड का लोन बाकि था जिसे 83 फीसदी नुकसान के साथ रिलायंस को बेच दिया गया। एस्सार पर करीब 54 हजार करोड़ ऋण बाकि था जिसे 23 फीसदी नुकसान उठाते हुए सरकार ने आर्सेलर मित्तल को 42 हजार करोड़ में बेच दिया। वहीं भूषण स्टील पर 57 हजार 505 करोड रुपये का लोन था जिसे टाटा को 35 हजार 571 करोड़ में बेच दिया। इसी तरह इलेक्ट्रोस्टील जिस पर 8हजार 179 करोड रुपये का लोन बाकि था उसे वेदांता ग्रुप को महजर 3 हजार 691 करोड में बेच दिया।  इसी तरह मोनेट इस्पात पर 11 हजार 478 करोड़ का लोन बकाया था जिसे 75 फीसदी नुकसान के साथ जेएसडब्ल्यू को 2 हजार 892 करोड़ रुपये में बेच दिया। 

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