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CAA, NRC और NPR के खिलाफ राजस्थान विधानसभा में संकल्प पेश

जनमंथन, जयपुर। राजस्थान विधानसभा में CAA, NRC व NPR तीनों के खिलाफ आज संकल्प पारित कर दिया गया। इससे पहले सदन में संकल्प पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। भाजपा विधायकों ने संकल्प पर गहरा विरोध जताया लेकिन संख्या बल के आधार पर मजबूत कांग्रेस के सामने वे टिक नहीं पाए। राजस्थान एक साथ NCR, CAA और NPR के खिलाफ संकल्प पारित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया। अब तक पंजाब और केरल में ही केवल CAA के खिलाफ संकल्प प्रस्ताव पारित किया गया है।

विधानसभा में CAA, NRC व NPR पर संकल्प को संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने पेश किया। संकल्प पेश करने के साथ ही भाजपा विधायकों ने आपत्ति जाहिर की और वे संकल्प के विरोध में वेल में आकर नारेजाबी करने लग गए। बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने संकल्प पर बहस की अनुमति दे दी लंबी बहस के बाद संकल्प पारित कर दिया गया। संकल्प पारित होने के बाद विधानसभा की कार्यवाही को 10 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

इससे पहले मंत्री धारीवाल ने संकल्प पेश करते हुए कहा कि सीएए को धर्म के आधार पर संविधान में प्रतिष्ठित किया गया है। उन्होंने इसे संविधान का उल्लंघन बताया। संकल्प पर बहस की अनुमति के बाद भाजपा विधायक सतीश पूनिया संकल्प पर बोलने लगे। उन्होंने कहा कि केंद्र के बनाए किसी कानून पर विधानसभा में इस तरह की चर्चा नहीं हो सकती। पूनिया ने कांग्रेस सरकार की ओर इशारा करते हुए कहा कि कानून तो आप को लागू करना पड़ेगा, आप के फूफा को भी लागू करना पड़ेगा।

कांग्रेस विधायक रफीक ख़ान ने कहा कि ये लोग महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की मूर्ति लगवाने की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि नाथूराम गोडसे महात्मा गांधी का हत्यारा था, हत्यारा था, हत्यारा था। रफीक खान ने आगे कहा कि पाकिस्तान में जो हिंदू आबादी घटी है वह बांग्लादेश टूटने की वजह से घटी है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को सीएए कानून को वापस लेना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आज सबसे ज्यादा देश के आर्थिक मुद्दों पर सोचने की जरुरत है अगर हालात ऐसे ही रहे तो देश की अर्थव्यवस्था बिल्कुल खराब हो जाएगी।

सीएए के खिलाफ संकल्प पर बहस पर बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि यह कानून लागू करने का काम केंद्र सरकार का है राज्य सरकार का नही। उन्होंने कहा कि अगर संकल्प ही लाना है तो कांग्रेस यह संकल्प लाए कि वे इस कानून को लागू नहीं होने देंगे। कटारिया ने कहा कि आपकी सात पीढ़ियों को भी इसे लागू करना पड़ेगा। संकल्प पर जवाब पेश करते हुए शांति धारीवाल ने कहा कि हमने राजतंत्र देखा है लेकिन भाजपाई संघतंत्र दिखाना चाहते है। उन्होंने कहा कि हमे शरणार्थियों को नागरिकता देने पर एतराज नहीं है लेकिन धर्म आधारित नागरिकता देने पर एतराज है।

धारीवाल ने कहा कि घुमन्तू लोग कहां से नागरिकता के दस्तावेज कहां से लाएंगे। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने सभी धर्मों के लोगो को इसमें शामिल किया लेकिन मुस्लिम और यहूदियों को क्यों नहीं लिया। धारीवाल ने कहा कि भले ही CAA और NRC को अलग अलग दिखा रहे हो, लेकिन जनता जानती है दोनों में गहरा संबंध है। शांति धारीवाल ने कहा कि आप लोगों को पता है कि आपके माँ बाप कहाँ पैदा हुए थे। शायद इस विधानसभा में किसी को भी पता नहीं होगा कि उनके मां – बाप कहां पैदा हुए हैं। आपके इस कानून से देश के नागरिकों में भय का माहौल है। अकेले असम में आप देख चुके हैं 16 लाख हिन्दू नागरिकता से बाहर हो चुके हैं।

संकल्प के ये है प्रमुख बिन्दु

– CAA से देश की एकता व अखंडता को खतरा है।

– सीएए संविधान की मूल भावना का उल्लंघन करता है।

– देश के एक बड़े वर्ग में इसको लेकर आशंका है.- NRC व NPR की प्रस्तावना समान हैं।

– NPR के नवीन प्रावधानों को वापस लेने के बाद ही जनगणना की जाए।

– यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है।

– CAA का लक्ष्य धर्म के आधार पर अवैध प्रवासियों में विभेद करना है।

– संविधान में यह स्पष्ट लिखा है कि भारत एक पंथ निरेपक्ष देश हैं।

– पंथ निरपेक्षता संविधान की आधारभूत विशेषता है इसलिए इसे बदला नहीं जा सकता।

– CAA का लक्ष्य धर्म के आधार पर अवैध प्रवासियों में विभेद करना है.

– धर्म के आधार पर ऐसा विभेद संविधान के प्रतिष्ठित पंथ निरपेक्ष आदर्शों के अनुरूप ही नहीं है।

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