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“अनोखा सत्याग्रह” – जमीन में धंसे राजस्थान के किसान सरकार से मांग रहे इंसाफ

जनमंथन, नींदड़/जयपुर। जेडीए द्वारा जमीन अवाप्त किए जाने के विरोध में शुरू हुआ राजस्थान के नींदड़ का ‘जमीन समाधि सत्याग्रह’ करीब दो साल बाद आज से शुरु हो गया है। नींदड़ बचाओ युवा किसान संघर्ष समिति के इस आंदोलन में गरीब किसान, महिलाएं और युवा जमीन समाधि सत्याग्रह पर उतर आ रहे हैं।

वसुंधरा सरकार में भी लंबा चला था “जमीन समाधि सत्याग्रह”

दरअसल गत वसुंधरा सरकार में जेडीए प्रशासन और संघर्ष समिति के बीच आपसी समझाईश के बाद यह आंदोलन रोक दिया गया था लेकिन 1 जनवरी 2020 से मौजूदा गहलोत सरकार में जेडीए ने फिर से यहां काम शुरु कर दिया है। संघर्ष समिति के संयोजक नगेन्द्र सिंह शेखावत के मुताबिक नींदड गांव में जेडीए ने बिना किसानों से बातचीत किये अचानक जमीन अवाप्ति शुरु कर दी है। शेखावत ने कहा कि जेडीए की इस तानाशाही के खिलाफ नींदड के किसानों दस साल से जारी यह आंदोलन एक बार फिर से शुरु करना पड़ा। 

नगेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि जयपुर विकास प्राधिकरण और राजस्थान सरकार ने इस आंदोलन को मजाक बना दिया। शेखावत ने कहा कि लड़ाई इस बात की है कि राज्य में 6 साल से नया भूमि अधिगृहण कानून लागू है बावजूद इसके जेडीए प्रशासन पुराने भूमि अधिगृहण कानून के जरिए किसानों की जमीन अवाप्त करना चाहती है जो कि एक काला कानून था। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर किसानों की जमीनों का अधिगृहण नहीं होने दिया जाएगा। 

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