भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बुरा रहा साल 2019 – खास रिपोर्ट जनमंथन न्यूज - Jan Manthan : latest news In Hindi , English
February 24, 2020
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भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बुरा रहा साल 2019 – खास रिपोर्ट जनमंथन न्यूज

-आशीष जोशी

जनमंथन, जयपुर। (आशीष जोशी की रिपोर्ट) साल 2019 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से काफी बुरा रहा। 2019 में भारत के वित्त मंत्री की कुर्सी पर लगातार तीन लोग काबिज रहे। दिवंगत अरुण जेटली के अस्वस्थ होने के बाद फरवरी में पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश किया तो लोकसभा चुनाव के बाद निर्मला सीतारमण ने वित्तमंत्री का पदभार संभाला। सरकार लगातार अर्थव्यवस्था के ढांचे को मजबूती देने का विजन बताती रही लेकिन असल में भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह धराशायी हो गई। और तो और जीडीपी, टैक्स और विश्व की सर्वोच्च इकोनोमी के शिखर से भी भारत लुढक कर नीचे आ गया।

साल 2019 में आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार को झटके पर झटके झेलने पडे। हांलाकि 2016 में नोटबंदी के बाद से लुढकी अर्थव्यवस्था ने संभलने का नाम नहीं लिया इस बीच सरकार एजेंसियों के विश्लेषण और व्यापारिक संगठनो की जद्दोजहद को झुठलाती रही। साल 2019 आते-आते अर्थव्यवस्था के हालाल और ज्यादा गंभीर हो गए ऐसे में सरकार की आर्थिक नीतियां भी कुछ खास नही कर सकी। इस साल सबसे बड़ा झटका जीडीपी ग्रोथ है. दरअसल, चालू वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही में जीडीपी का आंकड़ा 4.5 फीसदी पहुंच गया…यह करीब 6 साल में किसी एक तिमाही की सबसे बड़ी गिरावट रही। वहीं कोर सेक्‍टर भी 8 साल के निचले स्‍तर पर पहुंच गया…-इस साल ऑटो, टेक्‍सटाइल, एफएमसीजी समेत कई बड़े सेक्‍टर में सुस्‍ती का दौर चला तो वहीं बेरोजगारी के मोर्चे पर भी सरकार, विपक्ष के निशाने पर रही….इसी तरह सरकार की ओर से अगले 5 साल में 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्‍य का जिक्र किया गया. बहरहाल, आइए कुछ आंकड़ों से समझते हैं कि आर्थिक मोर्चे पर यह साल कैसा रहा-   

वित्त वर्ष 2019    GDP ग्रोथ रेट

पहली तिमाही        8 फीसदी

दूसरी तिमाही        7 फीसदी

तीसरी तिमाही        6.6 फीसदी

चौथी तिमाही        5.8 फीसदी

वित्त वर्ष 2020    ग्रोथ रेट

पहली तिमाही        5 फीसदी

दूसरी तिमाही        4.5 फीसदी

चलिए सबसे पहले नजर डालते हैं साल 2019 में भारतीय अर्थव्यवस्था से जुडी कुल 19 खास बातों पर….

लोकसभा चुनाव की वजह से इस साल दो बार बजट पेश किया गया

साल 2019 खत्‍म होने को है. यह साल राजनीतिक से लेकर अन्‍य दूसरे क्षेत्रों में ऐतिहासिक रहा लेकिन अर्थव्‍यवस्‍था के लिहाज से बुरा रहा. लोकसभा चुनाव की वजह से इस साल दो बार बजट पेश किया गया. वहीं अलग- अलग समय में वित्त मंत्री के तौर पर तीन लोग सक्रिय रहे.साल के पहले महीने में वित्त मंत्री के तौर पर दिवंगत अरुण जेटली सक्रिय थे लेकिन तबीयत खराब होने की वजह से लोकसभा चुनाव से पहले 1 फरवरी 2019 को पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट पेश किया. वहीं लोकसभा चुनाव के बाद बतौर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पदभार संभाला.

ऑटो, टेक्‍सटाइल, एफएमसीजी समेत कई बड़े सेक्‍टर में रही सुस्‍ती

साल 2019 में ऑटो, टेक्‍सटाइल और एफएमसीजी सेक्‍टर के सेल्‍स और प्रोडक्‍शन में लगातार गिरावट रही. वहीं जीडीपी समेत अन्‍य आर्थिक आंकड़ों की वजह से भी निराशा का माहौल बन रहा है.. इस बीच, मोदी सरकार एक्‍शन मोड में आई और टास्क फोर्स समिति का गठन किया..जिसने अगले 5 साल में 1.4 ट्रिलियन डॉलर का निवेश बढ़ाने के लिए रोडमैप तैयार करने का दावा किया 31 अक्‍टूबर तो यह रोडमैप समिति ने वित्त मंत्रालय को सौंपा लेकिन 2019-20 में निवेश का जो लक्ष्य था उसकी शुरुआत भर भी नहीं हो पाई।

मंदी से जूझ रहे व्यापारियों के लिए दिवाली से पहले राहत की बौछारें

अक्टूबर 2019 से पहले फेस्टिवल सीजन में मंदी से व्यापार जगत को राहत देने के लिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कई घोषणाओं का ऐलान किया। इनमें सबसे प्रमुख घोषणा थी सरकारी बैंकों को 17000 करोड रुपये देने का ऐलान। इसी के साथ सीएसआर के उल्लंघन को दंडनीय अपराध से भी मुक्त कर उद्यमियों को बडी राहत दी गई इसके अलावा एफपीआई पर बढाए गए सरचार्ज को भी सरकार ने वापस ले लिया।

साल 2019 में देश की जीडीपी 6 साल के सबसे निचले स्‍तर पर पहुंची

देश की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर घटकर दूसरी तिमाही में 4.5 फीसदी पर आ गई. इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 5 फीसदी थी. पिछले वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही आर्थिक वृद्धि दर 7 फीसदी थी. हालांकि, विश्लेषकों ने सितंबर तिमाही में वृद्धि दर कम रहने का अनुमान जताया था. लेकिन, 4.5 फीसदी की वृद्धि दर अनुमान के मुकाबले कम है. रायटर्स के पोल में अर्थशास्त्रियों ने इसके 4.7 फीसदी रहने का अनुमान जताया था. 

कम हुआ रेटिंग एजेंसियों का भरोसा

इंडिया टुडे की डाटा इंटेलीजेंस यूनिट (DIU) ने साल की शुरुआत में रेटिंग एजेंसियों के अनुमानों की तुलना वर्तमान जीडीपी आंकड़ों से की तो पाया कि एक साल से भी कम समय में रेटिंग एजेंसियों ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए जीडीपी विकास दर का अनुमान 1.5 फीसदी तक घटा दिया है. DIU ने कुल आठ रेटिंग एजेंसियों/वित्तीय संस्थानों के आंकड़ों का विश्लेषण किया. इनमें भारतीय रिजर्व बैंक,भारतीय स्टेट बैंक, विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, क्रेडिट रेटिंग एजेंसी CRISIL, मूडीज और केयर रेटिंग्स शामिल हैं. साल की शुरुआत में लगभग इन सभी वित्तीय संस्थानों ने उम्मीद जताई थी कि भारत की जीडीपी की विकास दर इस साल 2018 से बेहतर रहेगी. हालांकि, ऐसा नहीं हुआ.

जीएसटी कलेक्‍शन लक्ष्‍य से दूर

जीएसटी कलेक्‍शन के मोर्चे पर भी यह साल सुस्‍त रहा. इस साल के पहले महीने यानी जनवरी में जीएसटी कलेक्‍शन 1 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया. वहीं मौजूदा वित्त वर्ष (अप्रैल-मार्च) के अप्रैल,मई, जुलाई और नवंबर में जीएसटी कलेक्‍शन का आंकड़ा 1 लाख करोड़ को पार किया. लेकिन इसके बावजूद यह सरकार के लक्ष्‍य से करीब 40 फीसदी कम है. बीते दिनों शीतकालीन सत्र के दौरान वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने सदन को इसकी जानकारी दी थी.

टैक्‍स कलेक्‍शन पर भी फेल

चालू वित्‍त वर्ष (1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020)  में डायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍शन, लक्ष्‍य के 50 फीसदी से भी कम हुआ है. बीते नवंबर महीने में सीबीडीटी की ओर से बताया गया कि सरकार का डायरेक्‍ट टैक्‍स कलेक्‍शन अबतक 6 लाख करोड़ रुपये रहा है. जबकि सरकार ने इस वित्‍त वर्ष में करीब 13.5 लाख करोड़ रुपये के टैक्‍स कलेक्‍शन का लक्ष्‍य रखा है. ऐसे में सरकार को लक्ष्‍य हासिल करने के लिए4 महीने में करीब 7.5 लाख करोड़ रुपये जुटाने होंगे.

राजकोषीय घाटे पर भी झटका

राजकोषीय घाटा के मोर्चे पर भी सरकार को झटका लगा है. पहले 7 महीनों यानी अप्रैल से अक्टूबर के बीच ही राजकोषीय घाटा मौजूदा वित्त वर्ष के लक्ष्य से ज्यादा हो गया है. शुरुआती 7 महीनों में राजकोषीय घाटा 100.32 अरब डॉलर रहा जो बजट में मौजूदा वित्त वर्ष के लिए रखे लक्ष्‍य का 102.4 फीसदी है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से अक्टूबर की अवधि में सरकार को 6.83 अरब रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ जबकि खर्च 16.55 अरब रुपये रहा.

इकोनॉमी पर कम हुआ भरोसा!

हाल ही में आरबीआई ने एक सर्वे रिपोर्ट को जारी करते हुए बताया है कि नवंबर में देश का कन्ज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स (CCI) 5 साल के निचले स्‍तर पर पहुंच गया है. यह 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद सबसे निचला स्तर है. कन्ज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स में गिरावट का मतलब ये हुआ कि देश की इकोनॉमी को लेकर लोगों का भरोसा कम हुआ है और ग्राहक खरीदारी नहीं कर रहे हैं.

शेयर बाजार ने देखा 17 साल का सबसे बुरा महीना

इस साल शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला. सेंसेक्‍स ने 41 हजार अंक को पार किया तो वहीं निफ्टी 12 हजार के नए रिकॉर्ड स्‍तर को छु लिया. इसके बावजूद बीते जुलाई महीने में भारतीय शेयर बाजार में 17 साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई. आंकड़े बताते हैं कि जुलाई 2019 में निफ्टी 5.68 फीसदी लुढ़का है जबकि सेंसेक्स में 4.86 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है. शेयर बाजार की ऐसी बुरी हालत साल 2002 में देखने को मिली थी. तब जुलाई के महीने में निफ्टी करीब 9.3 फीसदी और सेंसेक्स करीब 8 फीसदी तक टूट गया था. वहीं इस दौरान विदेशी निवेशकों का भी भारतीय बाजार पर भरोसा घटा है.

रेलवे का बुरा दौर!

हाल ही में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग)  की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय रेलवे की कमाई बीते 10 सालों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है. ताजा रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे का ऑपरेटिंग रेशियो यानी परिचालन अनुपात वित्त वर्ष 2018 में 98.44 फीसदी तक पहुंच चुका है. इसका मतलब ये हुआ कि वित्त वर्ष 2017-18 में रेलवे ने 100 रुपये की कमाई के लिए 98 रुपये 44 पैसे खर्च कर दिए. यानी इस दौरान रेलवे को सिर्फ 1 रुपये 56 पैसे का मुनाफा हुआ.

महंगाई ने तोड़ी कमर

इस साल महंगाई ने भी आम लोगों की कमर तोड़ दी. प्‍याज, टमाटर समेत अन्‍य सब्‍जियां हों या फिर पेट्रोल, डीजल और सोना-चांदी हों, इनकी कीमतों में इजाफे ने आम लोगों की कमर तोड़ दी. सोना 40हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्‍तर को पार कर लिया तो वहीं चांदी 50 हजार रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिका. प्‍याज 120 रुपये किलो तो टमाटर 100 रुपये किलो के भाव पर पहुंच गया. इन हालातों में  आरबीआई ने हाल ही में महंगाई दर का अनुमान भी बढ़ा दिया है. इसका मतलब होली तक लोगों को महंगाई से राहत नहीं मिलेगी.

स्टार्टअप्स और उनके निवेशकों के लिए एंजेल टैक्स के प्रावधान को वापस लिया

नए स्टार्टअप्स के साथ ही निवेशकों को बढावा देने के लिहाज से केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिवाली से पहले स्टार्टअप्स और निवेशकों के लिए किए गए एंजेल टैक्स के प्रावधान को वापस ले लिया। इससे शुरुआती तौर पर बाजार से जुडे स्टार्ट अप्स संचालकों और एन्टरप्रैन्योर्स को राहत मिली।

एमएसएमई सेक्टर और स्टार्ट अप्स को करना पडा संघर्ष

साल 2019 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से बुरा रहा। दरअसल आर्थिक सुधार के नाम पर देश में की गई नोटबंदी इसका सबसे बडा कारण बनी। 2016 में हुई इस नोटबंदी का असर 2019 में देश के एमएसएमई सेक्टर पर सबसे ज्यादा देखने को मिला। नए एन्टरप्रैन्योर्स अपने व्यापार को आगे बढाने में या तो असफल रहे या उन्हें कठिनाईयों का सामना करना पडा।

मोदी सरकार ने रोजगार को लेकर बनाया शर्मनाक रिकॉर्ड

रोजगार देने में मोदी सरकार फेल रही। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों से खुलासा हुआ कि भारत की बेरोजगारी दर 2019 में बढ़कर 7.2 फीसदी तक पहुंच गई। यह सितंबर 2016 के बाद की उच्‍चतम दर है, फरवरी 2018 में बेरोजगारी दर 5.9 प्रतिशत रही थी। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव के दौरान वादा किया था कि अगर उनकी सरकार बनी तो हर साल 2 करोड़ लोगों को रोजगार दिया जाएगा।

राजकोषीय घाटे पर भी झटका

राजकोषीय घाटा के मोर्चे पर भी सरकार को झटका लगा है. पहले 7 महीनों यानी अप्रैल से अक्टूबर के बीच ही राजकोषीय घाटा मौजूदा वित्त वर्ष के लक्ष्य से ज्यादा हो गया है. शुरुआती 7 महीनों में राजकोषीय घाटा 100.32 अरब डॉलर रहा जो बजट में मौजूदा वित्त वर्ष के लिए रखे लक्ष्‍य का 102.4 फीसदी है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से अक्टूबर की अवधि में सरकार को 6.83 अरब रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ जबकि खर्च 16.55 अरब रुपये रहा.

RBI ने जारी किए फंसे कर्ज की वसूली के नए नियम, बैंकों को होगा फायदा

एक आरटीआई के आंकड़ों के मुताबिक शीर्ष 100 एनपीए क़र्ज़दारों का एनपीए 4,46,158 करोड़ रुपये बताया गया,  जो कि देश में कुल एनपीए 10,09,286 करोड़ रुपये का क़रीब 50 फीसदी है.इस आंकडे के बाद देश का वित्त मंत्रालय हरकर में आया और आरबीआई को नए नियम बनाने के निर्देश मिले। भारतीय रिजर्व बैंक के भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को ऋण भुगतान में चूक के मामलों को 30 दिन के अंदर चिह्नित कर उसकी वसूली/समाधान की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश मिले।

अर्थव्यवस्था को एक और झटका, आरबीआई ने कहा एनपीए अभी और बढ़ेगा

सरकारी बैंकों के एनपीए में अभी और वृद्धि होगी. रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट जारी कर इसकी जानकारी दी। आरबीआई की रिपोर्ट में बताया गया कि रियल्टी क्षेत्र को दिए गए कर्ज़ के मामले में एनपीए का अनुपात जून 2018 के 5.74 की तुलना में जून 2019 में 7.3 फ़ीसदी हो गया है। सरकारी बैंकों को मामले में स्थिति और भी ख़राब है क्योंकि ऐसे कर्ज़ के मामले में उनका एनपीए 15 फ़ीसदी से बढ़कर 18.71 फ़ीसदी हो गया है।

  राजकोषीय घाटा अनुमानित लक्ष्य से कई गुना बढ़ा

2019 के फरवरी में पेश हुए अंतरिम बजट के दौरान सरकार ने वित्त वर्ष 2019-20 में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.4 फीसदी तक रखने का लक्ष्य तय किया था.गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2019-20 के पहले दो महीनों में सरकार का राजकोषीय घाटा पूरे साल के लक्ष्य के 52 फीसदी तक पहुंच गया था. फरवरी के अंतरिम बजट में सरकार ने वित्त वर्ष 2019-20 में 7.03 लाख करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे का अनुमान लगाया था।

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