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राजस्थान में लोकसभा चुनाव का पहला चरण 29 अप्रैल को, सबसे बड़ा मुकाबला जोधपुर में

जनमंथन, जोधपुर। लोकसभा चुनाव का असली मुकाबला प्रदेश की हॉट सीट जोधपुर में देखने को मिलेगा। यहां मुकाबला केन्द्रीय राज्य मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत के बीच है। शेखावत को भाजपा ने फिर से उम्मीदवार बनाया है तो इस बार कांग्रेस ने वैभव को मैदान में उतार दिया। यानि दो बड़े नेताओं की साख दांव पर लगी है।

गर्मी के तीखे तेवरों के बीच राजस्थान में सियासत भी उफान पर है। कांग्रेस, भाजपा दोनों ने अपना मिशन -25 तय कर रखा है। बीजेपी के सामने 2014 के आम चुनाव की तरह क्लीन स्वीप करने का चैलेन्ज है। जबकि कांग्रेस की तैयारी 4 महीने पूर्व हुए विधानसभा चुनाव से भी अच्छे प्रदर्शन की है। लोकसभा चुनाव के चतुर्थ चरण में 29 अप्रैल को राजस्थान की 13 लोकसभा सीटों पर वोटिंग होगी। इस चरण का सबसे रोचक और बड़ा मुकाबला जोधपुर में है। यहां भाजपा से केन्द्रीय कृषि मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और कांग्रेस से सीएम गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत आमने सामने हैं। बता दें कि कुछ माह पहले हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जोधपुर संसदीय क्षेत्र की ज्यादातर विधानसभा सीटों पर जोरदार प्रदर्शन किया। आइये जरा नजर डालते हैं।


-जोधपुर संसदीय क्षेत्र में आठ विधानसभा क्षेत्र हैं।
-फलोदी, लोहावट, शेरगढ़, सरदारपुरा, शेओर, सूरसागर, लूणी, पोकरण।
-विधानसभा चुनाव 2013 और विधानसभा चुनाव 2018 की तुलना।
-2013 में जोधपुर संसदीय क्षेत्र से गहलोत ही 1सीट कांग्रेस के खाते में जोड पाए थे।
-बाकि 7 सीटों पर था भाजपा का कब्जा।
-2018 के विधानसभा चुनाव में इन 8 विधानसभा सीटों में से 6 पर कांग्रेस का कब्जा।
-2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 2 सीटों पर सिमटी।
-लोकसभा चुनाव 2014 के मुकाबले भी कांग्रेस ने जोधपुर संसदीय क्षेत्र में बनाई बढत।
-2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 1 लाख 12 हजार 47 वोटों बढत बनाई है।

बता दें कि राजस्थान में 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने ने मोदी लहर पर सवार होकर सभी 25 सीटें जीतकर क्लीन स्वीप किया था। इस दौरान ही जोधपुर से बीजेपी ने गजेन्द्रसिंह शेखावत को पहली बार चुनाव मैदान में उतारा था। जोधपुर पूर्व नरेश गजसिंह की बहन और तत्कालीन केन्द्रीय राज्य मंत्री चंद्रेश कुमारी कांग्रेस प्रत्याशी थी। शेखावत ने चंद्रेश कुमारी को 2014 के लोकसभा चुनाव में 4 लाख 10 हजार 51 वोटों के बडे अंतर से हराया था।

अब विधानसभा चुनाव 2018 में जोधपुर संसदीय क्षेत्र में भाजपा को हुए भारी नुकसान की भरपाई करना गजेन्द्रसिंह शेखावत के लिए बड़ी चुनौती नजर आ रहा है। दूसरा सीएम गहलोत पुत्र वैभव को जीत दिलाने के लिए यहां अपने सारे सियासी तजुर्बें को झोंक देंगे। हांलाकि कुछ ऐसी बातें हैं जिनके चलते गजेन्द्र सिंह शेखावत भी क्षेत्र में अपना जनधार रखते हैं।

-RSS की पहल पसंद।
-कई वर्षों तक सीमांत लोक संगठक के लिए कार्य किया।
-सोशल मीडिया पर सक्रियता ज्यादा है, PM मोदी की गुडबुक में शामिल हैं।
-हाजिरजवाब हैं, जनता से बेहतर जुड़ाव।
-सर्वाधिक राजपूत वोट बैंक वाले जोधपुर संसदीय क्षेत्र में राजपूत चेहरा हैं।
-भाजपा के पास शेखावत के अलावा को अन्य राजपूत चेहरा नहीं।
-छात्र राजनीति में अव्वल रहे और जनता के नजदीक रहे।
-सामान्य वर्ग की जातियों के साथ ही अन्य समाजों में भी अच्छी छवि।
-गत सालों में प्रदेशाध्यक्ष के पद पर भी नाम आगे आया, मोदी के चहेते के तौर पर फेमस हुए।
-राजस्थान में केन्द्रीय नेतृत्व के सबसे करीब माने जाते हैं।

जोधपुर संसदीय क्षेत्र में कुल 17 लाख 27 हजार 363 मतदाता आते हैं, जिसमें 9 लाख 10 हजार 466 पुरुष मतदाता और 8 लाख 16 हजार 897 महिला मतदाता शामिल हैं। जातीय समीकरणों की बात करें तो यहां की आठों सीटों के शहरी और ग्रामीण वोटों के आकलन से सामने आया है कि कांग्रेस ने गत विधानसभा चुनावों में गांवों में ज्यादा पकड़ बनाई है। किसानों की नाराजगी भाजपा को भारी पड़ी थी। शहरी क्षेत्र का सरदारपुरा एकतरफा कांग्रेस के पक्ष में रहा। भाजपा का शहर सीट पर बूथ मैनेजमेंट फेल नजर आया था। इसके अलावा शेरगढ़, पोकरण व सरदारपुरा राजपूत बाहुल्य हैं। वहां का वोट बैंक भी भाजपा से खिसक गया। जोधपुर में हिंदुत्वे भले एजेंडा रहा हो लेकिन गहलोत को अपनी जाति के साथ ही ब्राहमण, क्षत्रिय, माथुर, माहेश्वोरी, सिंधी, रावणा राजपूत, सुनार, कुम्हाार, घांची, जाट, विश्नो ई आदि पिछड़ी जातियों का समर्थन मिला हुआ है, जो कि विधानसभा चुनाव के दौरान नजर आया, दलितों में मेघवाल और जनजाति में मीणा और भीलों को भी गहलोत के रणनीतिकार साधने में जुटे हैं। वैभव गहलोत को उम्मीद है कि उन्हें सर्व समाज का समर्थन मिलेगा।

इस बार लोकसभा चुनाव के दौरान यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अपने गढ़ जोधपर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का जादू दिसंबर माह में हुए विधानसभा चुनावों की तरह कायम रहता है या नहीं। कांग्रेस को जोधपुर लोकसभा सीट जिताना गहलोत के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

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