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भितरघात के खतरे से बचने के लिए भाजपा दौसा से उतारेगी जसकौर मीणा को!

जनमंथन, जयपुर। भाजपा ने राजस्थान की 25 में से 24 लोकसभा सीटों के लिए अपने प्रत्याशियो की घोषणा कर दी है लेकिन दौसा का पेंच अभी भी फंसा हुआ है। ऐसा नहीं है कि भाजपा के पास यहां से उतारने के लिए चेहरे नहीं हैं, बस भाजपा यहां जिताऊ चेहरे पर दांव खेलना चाहती है। आखिर कौन होगा? वह जिताऊ चेहरा यह कह पाना भी भाजपा के लिए अभी मुश्किल होता नजर आ रहा है क्योंकि भाजपा अगर एक को टिकट देती है तो दूसरे से भितरघात का खतरा है।

गौरतलब है कि मीणा बाहुल्य दौसा लोकसभा सीट को 2009 में अनुसूचित जनजाति के आरक्षित कर दिया था। राज्यसभा सांसद डॉ. किरोड़ीलाल मीणा यहां से अपनी पत्नी गोलमा देवी के लिए टिकट मांग रहे हैं। क्षेत्र में डॉ. किरोड़ी के चिर प्रतिद्वन्दी माने जा रहे ओमप्रकाश हुड़ला भी टिकट की कतार में है। वे भी अपनी पत्नी प्रेमप्रकाश हुड़ला को टिकट दिलाना चाहते हैं। इस कतार में पूर्व केन्द्रीय मंत्री जसकौर मीणा और रामकिशोर मीणा का नाम भी प्राथमिकता से लिया जा रहा है।

डॉ. किरोड़ी ने विधानसभा चुनाव में पार्टी को पहुंचाया नुकसान
पार्टी सूत्रों की मानें 2018 के विधानसभा चुनाव परिणामो को देखते हुए भाजपा डॉ. किरोड़ीलाल मीणा या गोलमा को टिकट देकर जोखिम नहीं उठाना चाहती है। बताया जा रहा है कि गत विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण में डॉ. किरोड़ी ने अपनी चलाई थी और इससे पार्टी को नुकसान हुआ। इन चुनावों में बांदीकुई, सिकराय, दौसा, लालसोट और चाकसू सीट पर कांग्रेस जीती, जबकि थानागाजी, बस्सी और महुआ सीट पर निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत हुई। इस लिहाज से दौसा की 8 में से 5 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व को लगने लगा है कि अब दौसा संसदीय क्षेत्र में डॉ. किरोड़ी की लोकप्रियता का ग्राफ गिरने लगा है। इसके अलावा किरोड़ी या गोलमा को टिकट देने पर चिरप्रतिद्वन्दी और महुवा विधायक ओमप्रकाश हुड़ला की नाराजगी का भी पार्टी को यहां नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पार्टी चाहती है कमजोर सीट पर मजबूत प्रत्याशी
अगर पार्टी ओमप्रकाश हुड़ला की पत्नी को यहां से प्रत्याशी बनाती है तो राजनैतिक वर्चस्व के अभाव और डॉ. किरोड़ी की नाराजगी से पार्टी को यहां नुकसान उठाना पड़ सकता है। दूसरी ओर भाजपा पारंपरिक रुप से कांग्रेस के दबदबे वाली दौसा लोकसभा सीट पर रामकिशोर मीणा को कमजोर उम्मीदवार के तौर पर देख रही है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व अब दौसा संसदीय क्षेत्र से पुरजोर तरीके से पूर्व केन्द्रीय मंत्री जसकौर मीणा के नाम पर विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि शिक्षित होने के साथ ही वे सभी सियासी और जातीय समीकरणों में बिल्कुल फिट बैठ रहीं हैं। जसकौर मीणा व्यवहारिक भी हैं और उनको यहां भितरघात का भी खतरा कम है। बता दें कि जसकौर मीणा सवाई माधोपुर से एक बार लोकसभा सांसद रह चुकी हैं। जसकौर भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में भी शामिल थी और लम्बे समय तक केंद्रीय कार्यकारिणी में उपाध्य्क्ष भी रही हैं। जसकौर मीणा भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने से पूर्व शिक्षिका थी। बाद में भाजपा की राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रभावित होकर राजनीति में सक्रिय हैं।

दौसा संसदीय क्षेत्र से जसकौर का जुड़ाव
दरअसल दौसा संसदीय क्षेत्र का मण्डावरी कस्बा पूर्व केन्द्रीय मंत्री जसकौर मीणा का जन्म स्थान है। जसकौर यहीं पली -बढी और लालसोट के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विधालय में बतौर शिक्षिका उनकी पहली पोस्टिंग हुई। अनुसूचित जनजाति बाहुल्य दौसा लोकसभा सीट पर अब मीणा समाज के साथ अन्य समाजों का भी जसकौर मीणा को पूर्ण समर्थन मिल रहा है। गौरतलब है कि जसकौर मीणा अनुसूचित जनजाति की पहली महिला सांसद और मंत्री रही हैं। उनके विकास कार्यों की बात करें तो केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री रहते हुए उन्होंने सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन से 18 ट्रेनों को जोड़ने का इतिहास रचा था। जयपुर से बयाना के लिए एक ट्रेन तो जसकौर के नाम से ही चलाई गई जो आज भी संचालित है। दौसा के आम आवाम का भी मानना है कि पिछले एक दशक में दौसा संसदीय क्षेत्र राजनीति का शिकार हुआ है और विकास कार्यों में पिछड़ा है। ऐसे में जसकौर मीणा को अगर यहां से मौका मिले तो दौसा की तस्वीर बदल जाएगी।

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