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देश के लोकसभा चुनाव में इस बार सिर्फ दो चेहरों पर लगेगी बाज़ी, दलों की विचारधारा और मुद्दे गौण

जनमंथन, नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 में इस बार बहुत कुछ नया है। इस बार सियासी दलों को आम आदमी के मुद्दे कम मुफीद लग रहे हैं, बल्कि सियासी चाशनी में ड़ूबे हुए मुद्दे इस बार ज्यादा चर्चाओं में हैं। एक मदताता राफेल डील घोटाले को उजागर करना चाहता है तो एक मतदाता सीमा पार पाक के नापाक इरादों को नेस्तनाबूद करना चाहता है। कुल मिलाकर देखा जाए तो इस बार का लोकसभा चुनाव किसी राजनैतिक दल या उम्मीदवार से प्रभावित न होकर देश के दो चेहरों पर केन्द्रित है।

डेढ करोड हिन्दुस्तानियों के जेहन की आवाज ही लोकतंत्र की आवाज है…इस आवाज को फिर से बुलंद करने के लिए लोकसभा चुनाव के महायज्ञ का आगाज हुआ है। इस महायज्ञ में मतदान की आहूति होनी है। कोई अपने हक के लिए तो कोई हैसियत के लिए, कोई नैतिक न्याय की उम्मीद में तो कोई जाति, धर्म, राष्ट्रवाद की भावना में बंधकर इस महायज्ञ में मतदान की आहूति देगा। खास बात है कि इस बार लोकसभा चुनाव का ट्रेंड काफी बदल चुका है। चुनावी चुनौतियां बदली हैं, मतदान की परंपरा बदली है और राजनैतिक दलों के एजेंडे इस बार गौण हैं। क्षेत्रीय दलो की बात ही छोड़ दीजिए, इस बार चुनाव सिर्फ दो चेहरों पर आकर ठहर गया है। ये दो चेहरे हैं भाजपा से ताल्लुक रखने वाले पीएम नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी।

हांलाकि कुछ क्षेत्रीय दल अपने अपने समीकरणों के साथ लोकसभा चुनाव में एनडीए और यूपीए के खेमें में जुड गए हैं। कुछ क्षेत्रीय दल भाजपा या कांग्रेस के बाहरी समर्थन से खुल्ले में लड रहे हैं तो कुछ महागठबंधन से जुड़कर मोदी को टक्कर देने में जुटे हैं। लेकिन इस महायज्ञ के दो ही महारथी हैं मोदी और राहुल गांधी। नई बात यह है कि इस बार के चुनाव में मोदी का विकास रथ सियासी समीकरण जोड़ने सीमा पार पहुंच गया है, तो कांग्रेस के राहुल गांधी अब राफेल मुद्दे को छोड न्यूनतम आय की थाली सजाकर चुनावी मैदान में हैं। हांलाकि इस बार चुनाव में घाटी के घमासान पर भी जोरदार सियासत जारी है। कुल मिलाकर हिन्दुत्व विचारधारा की पार्टी मानी जाने वाली भाजपा के लिए मोदी पर ही सबसे बडा भरोसा है वहीं सेक्युचर विचारधारा की कांग्रेस के लिए राहुल गांधी।

इस बार मोदी के खिलाफ क्षेत्रीय दलों का महागठबंधन भी खड़ा है। हांलाकि माना यह भी जा रहा है कि क्षेत्रीय दलों के निजी हित ही चुनावों में असली गठबंधन बनाते हैं, यानि महागठबंधन के महारथी राहुल के साथ जुडे रहेंगे या फिर मोदी के साथ जुड जाएंगे यह चुनाव परिणाम के बाद ही तय होगा। देश के जिन क्षेत्रीय दलों का गठन अपनी अलग-थलग विचारधाराओं के लिए हुआ था वे अब विचारधारा से परे कांग्रेस और भाजपा के साथ गठबंधन कर रहे हैं। जिस भ्रष्टाचार से कुपित होकर आम आदमी पार्टी देश में उपजी थी आज उसने भी कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल कहते हैं कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी का विज़न देश हित मे हैं। कुल मिलाकर अपने राजनैतिक अस्तित्व से जुड़े हितों के खातिर अब राजनैतिक दलों की विचारधारा गौण हो गई है।

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