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January 22, 2019
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अटल बिहारी वाजपेयी में थी ये 7 खूबियां, जिनसे उनका व्यक्तित्व बना महान

जनमंथन, नई दिल्ली । पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर पूरा देश शोक में डूब गया है। विशाल व्यक्तित्व के धनी अटल बिहारी वाजपेयी का भाजपा ही नहीं विपक्षी दलों के दिग्गज भी सम्मान करते थे। ऐसा ही नजारा गुरुवार को देखने को मिला जब सभी तरह के मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए सभी दलों के नेता अटल जी को श्रद्धांजलि दे रहे थे। कोई काव्यात्मक शैली में तो राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर उनकी सराहना कर रहा था। लेकिन सच भी है अटल बिहारी वाजपेयी वाकई कुशल राजनेता और विशाल व्यक्तित्व वाली महान विभूति थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि अटल जी भले ही हमें छोड़कर चिरनिद्रा में लीन हैं लेकिन उनकी वाणी, उनका जीवन दर्शन सभी भारतवासियों को हमेशा प्रेरित करेगा। उनका ओजस्वी, तेजस्वी और यशस्वी व्यक्तित्व सदैव देशवासियों का मार्गदर्शन करेगा। आइए जानते हैं वाजपेयी से जुडी 7 बातें जिनकी वजह से वे इतने खास थे।

उदारवादी व्यक्तित्व
अटल बिहारी वाजपेयी कभी भी किसी राजनैतिक विचारधारा के अधीन नहीं रहे। वे दलगत राजनीति से फैसले करते थे जिनमें मानवीयता भी समाहित होती थी। उनके इस उदारवादी व्यक्तित्व का अहसास कराती एक घटना है जब प्रधानमंत्री रहते हुए कश्मीर से लेकर पाकिस्तान तक बातचीत का दौर शुरु हुआ। अलगाववादियों से बातचीत के फैसले पर सवाल उठा गए थे कि बातचीत संविधान के दायरे में होगी? इस पर उन्होंने जवाब दिया कि , इंसानियत के दायरे में होगी।

आलोचना सुनने का था साहस
अटल बिहारी वाजपेयी में वो कला थी जो आज के राजनेताओं में शायद ही मिले। वे विरोधियों को भी साथ लेकर चलने में सक्षम थे। आत्मीय मंथन और उनके धैर्य के चलते उनके पास यह कला था कि विपरीत विचारधारा के नेताओँ को साथ लेकर उन्होंने गठबंधन सरकार बनाई। अपनी आलोचनात्मक शैली को वे संतुलित रखते थे- विपक्षी दलों के नेताओं की वे आलोचना करते थे लेकिन आलोचना सुनने का भी साहस रखते थे। विरोधी लोग भी उनकी बातों को इत्मिनान से सुनते थे।

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हिंदी प्रेमी थे
अंतर्राष्ट्रीय मंच पर दुनिया को संबोधित करते हुए उन्हें हिन्दी बोलने पर कोई संकोच नहीं था। वे हिन्दी को वैश्विक स्तर पर सम्मान दिलाना चाहते थे। 1977 में जब वे जनता सरकार में विदेश मंत्री थे उस दौरान संयुक्त राष्ट्र संघ में उनके द्वारा दिया गया भाषण काफी लोकप्रिय हुआ जो खालिस हिंदी में था। हिंदी में उनके झकझोर देने वाले उद्बोधन पर यूएन के प्रतिनिधियों ने खड़े होकर तालियां बजाईं थीं। इसके बाद कई बार अंतर्राष्ट्रीय मंच पर वाजपेयी ने हिन्दी में दुनिया को संबोधित किया।

विपक्षी भी वाजपेयी के अंदाज के कायल थे
अटल बिहारी वाजपेयी की तार्किक शैली और वाकपटुता से विरोधी भी उनके कायल थे। 1994 में जब केंद्र की कांग्रेस सरकार ने वाजपेयी को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में भारत का प्रतिनिधित्व करने का जिम्मा सौंपा तो पूरा विश्व हतप्रभ रह गया। एक विपक्षी दल के नेता पर किसी गवर्नमेंट को इतना भरोसा यह वाकई चौंकाने वाला था।

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मुश्किल घडियों में भी इंसानियत को माना सर्वोपरि
भेद भाव की राजनीति से वे दूर थे। वे जाति-संप्रदाय से ऊपर उठकर इंसानियत की भाषा ही समझते थे। गुजरात दंगों के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए उनका यह बयान आज भी यादगार है जब वाजपेयी ने कहा- मेरा एक संदेश है कि वह राजधर्म का पालन करें। राजा या शासक के लिए प्रजा-प्रजा में भेद नहीं हो सकता। न जन्म के आधार पर, न जाति के आधार पर और न संप्रदाय के आधार पर।

निडर थे अटल
अटल बिहारी वाजपेयी दुनिया में भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र के रुप में प्रस्तुत करना चाहते थे। 1998 में पोकरण परमाणु परीक्षण उनकी इसी सोच को इंगित करता है। उन्होंने पूरी दुनिया को चेतावनी देते हुए कहा था कि भारत मजबूत होगा, तभी आगे जा सकता है। कोई उसे बेवजह परेशान करने की जुर्रत ना करे।

काव्यात्मक शैली की कायल थी दुनिया
वाजपेयी के हृदय में एक राजनेता से ज्यादा एक कवि बसता था। उनकी कविताएं लोगों के जेहन को झकझोरती रही हैं। हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं, गीत नया गाता हूं… उनकी लोकप्रिय कविताओं में शुमार हैं। सदन से लेकर जनसभाओं तक में वह हमेशा काव्यात्मक अंदाज में आ जाते थे।

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