November 16, 2018
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घर के नाम पर झूठे सपने बेच रहा SNG ग्रुप, पार्थ सिटी के साथ ही ज्यादातर प्रोजेक्ट्स में अनियमितताएं आई सामने

जनमंथन, जयपुर। रिएल एस्टेट में कभी खास पहचान रखने वाले एसएनजी ग्रुप पर आज बैंकों की करोडों की लेनदारिया हैं। SNG के पीतल फैक्ट्री, दूध मंडी चौराहा और विद्याधर नगर स्थित कई प्रोजेक्ट्स हैं जिनमें कई ऐसी हैं जिनके बेचान पर कोर्ट का स्टे है। आरोप है कि पार्थ सिटी प्रोजेक्ट से जुडे 1100 करोड रुपये के सिंडिकेट घोटाले में SNG Group ग्रुप के चेयरमैन सत्यनारायण गुप्ता यह कहकर बच गए थे कि वे इस प्रोजेक्ट में डेवलपर हैं जबकि प्रोजेक्ट की कई विला सत्यनारायण गुप्ता ने परियोजना के निदेशक के तौर पर बेची है। झूठे सपनों की इस विवादित वर्ल्ड क्लास सिटी के बाशिंदों को अब बैंकों की रिकवरी का डर सता रहा है।

एसएनजी ग्रुप, रिएल एस्टेट का बडा नाम, ऐसा नाम जो घर बेचने की बात करके सिर्फ हसीन सपने बेचता है, ऐसे सपने जो बाद में बडे खौफनाक बन जाते हैं। जी हां राजधानी जयपुर में एसएनजी ग्रुप के ज्यादातर प्रोजेक्ट्स विवादों में हैं। कई प्रोजेक्ट्स में भूस्वामियों ने आपत्ति जताई तो कई प्रोजेक्ट्स में बैंक लोन के बकाया भुगतान के चलते एनओसी जारी नहीं की गई। हांलाकि आरोप यह है कि एसएनजी ग्रुप के चेयरमैन सत्यनारायण गुप्ता धोखाधड़ी से लोगों को इन विवादित आवासीय योजनाओं के फ्लैट भी बेच रहे हैं।

बात यहीं खत्म नहीं होती है एसएनजी ग्रुप के तार कहीं ना कहीं प्रदेश के सबसे बडे सिंडिकेट बैंक घोटाले से भी जुडे हैं। 1100 करोड रुपये के इस घोटाले में हांलाकि गुमान ग्रुप के चेयरमैन शंकर खंडेलवाल को सजा हो गई थी और प्रवर्तन निदेशालय से सत्यनारायण गुप्ता यह कहकर बच गए कि वे पार्थ सिटी परियोजना में केवल डेलवपर हैं- ना कि बिल्डर। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि जेल जाने के बाद गुमान ग्रुप (Guman Group Builders) के चेयरमैन शंकर खंडेलवाल ने कूटनीतिक तरीके से अपनी संपत्ति को प्रवर्तन निदेशालय और बैंकों के हाथों से बचाने के लिए अपने पार्टनर सत्यनारायण गुप्ता की कंपनी मैसर्स गोविन्द महिमा रियल मार्ट प्राईवेट लिमिटेड (Govind mahima realmart private limited) को जेल से ही बोर्ड ऑफ रेगुलेशन मीटिंग कर ज्वॉइन्ट वेंचर का निदेशक नियुक्त कर बची हुई पार्थ सिटी की संपत्ति का बेचान करवा दिया। सत्यनारायण गुप्ता ने भी पार्थ सिटी की ज्यादातर खाली भूमि को अपने निजी रिश्तेदारों के नाम बेचान दिखा दी। यही नहीं सत्यनायण गुप्ता ने विवादित पार्थ सिटी के कई विला भी घोखाधडी से बेच दिए हैं, विलाधारियों को अब बैंको की रिकवरी की डर सता रहा है।

जयपुर के कालवाड़ रोड स्थित माचवा ईलाके में 110 एकड जमीन पर निर्मित इस पार्थ सिटी परियोजना को रिएल एस्टेट का सबसे बडा धोखा कहा जा सकता है। एसएनजी ग्रुप और गुमान ग्रुप के इस ज्वॉइन्ट वेंचर में पार्थ सिटी को वर्ल्ड क्लास सिटी बताकर बेचा गया। इस प्रोजेक्ट को बेचने के लिए इसकी थ्रीडी जारी की गई जिसमें खूबसूरत 90 स्वतंत्र विला दिखाए गए। इसके अलावा 700 कॉमर्शियल अलग से दिखाए गए। वर्ल्ड क्लास सिटी में वर्ल्ड क्लास अस्पताल दिखाया गया तो शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मिनी थियेटर, हैल्थ क्लब हाउस जैसे सपने भी दिखाए गए। यही नहीं बडी धांधली करके खसरों में काउंट होने वाली जमीन को जेडीए एप्रूव्ड भी बताया गया, लेकिन 4 साल गुजरने के बावजूद इनमें से एक भी सुविधा यहां विकसित ना हो सकी। आखिर होती भी कैसे इसी परियोजना की भूमि पर एक ब़डी साजिश के तहत् सिंडिकेट बैंक घोटाले की नींव रखी गई थी, यही नहीं इस परियोजना को खडा करने के लिए डीएचएफएल से भी करीब 62 करोड़ रुपये का लोन लिया गया। झूठ बोलकर लोगों को विला बेच दिए गए लेकिन बैंकों की लेनदारियां होने के चलते लोगों को एनओसी (NOC) नहीं मिली है। अब पार्थ सिटी के विलाधारियों को पल पल डर सता रहा है कि कहीं उनके सपनों का घरौंदा रिकवरी में ना चला जाए।

ये सपने दिखाए गए थे लोगों को

आइये जानते हैं पार्थ सिटी प्रोजेक्ट की जमीनी हकीकत….
1.शॉपिंग कॉम्प्लेक्स- जहां शॉपिंग कॉम्प्लेक्स दिखाया गया था वहां अन्य लोगों की बेचान दिखा रखी है।
2.मिनी थियेटर- जो आज तक अस्तित्व में ही नहीं है।
3. हैल्थ क्लब हाउस- खण्डहर पडा है, पूरा बनाया ही नहीं है।
4. वर्ल्ड क्लास सिटी में वर्ल्ड़ क्लास अस्पताल का वादा अधूरा।
5. जमीन जेडीए अप्रूव्ड नहीं है, 90 बी भी नहीं है बल्कि खसरों में हैं।
6. विला के पास खाली जमीन में करीब 700 कॉमर्शियल फ्लैट बनाने की बात थी जो अधूरा है।
7.विला में घटिया मटिरियल के चलते कई घरों की छत और दीवारों का प्लास्टर उखडकर नीचे आ गिरा है।
8. पानी का बोरिंग क्षेत्र- दूसरे व्यक्ति के कब्जे में हैं जिसे कभी भी बंद कर पार्थ सिटी निवासी पानी से वंचित किए जा सकते हैं।
9.बाउण्डरी वाल नाम मात्र है पूरा इलाका खुला है जहां मवेशी और जंगली जानवर आराम से आते जाते हैं।
10.4 साल से ज्यादा का समय हो चुका है लेकिन प्रोजेक्ट अधूरा पडा है।

एसएनजी ग्रुप के चेयरमैन सत्यनारायण गुप्ता पर वर्तमान में कई बैंको की लेनदारियां हैं तो कई प्रोजेक्ट्स में बड़ा घालमेल भी सामने आ रहा है। आंध्रा बैंक ने सत्यनारायण गुप्ता और उसकी पत्नी सुशीला गुप्ता के नाम डिमांड नोटिस जारी कर बैंक के बकाया 14 करोड 60 लाख 456 रुपये की राशि की रिकवरी के लिए अखबार में हाल ही में विज्ञप्ति जारी की है। एसएनजी के पीतल फैक्ट्री, दूध मंडी चौराहा और विद्याधर नगर स्थित ज्यादातर प्रोजेक्ट्स पर कोर्ट का स्टे लगा हुआ है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि घरों की बजाय एसएनजी झूठे सपने बेच रहा है। सबसे बडी बात यह है इतने विवादों के बावजूद एसएनजी ग्रुप का सरकारी आवासीय योजनाओं से भी नाम जुडा हुआ है।

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