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इंसान के मल से निकाला जाएगा अब सोना, अमेरिका करेगा उत्पादन

जनमंथन, नई दिल्ली। इंसानी सभ्यता जब से शुरू हुई है तभी से सोने को लेकर दुनिया में दीवानगी छाई है। 21 वीं सदी चल रही है और आज भी सोने की चमक इंसानी आंखों को चौंधिया देती है। किसी देश की अर्थव्यवस्था भी कहीं ना कहीं सोने के आधार पर ही मजबूत और कमजोर आंकी जाती है। लेकिन आम आदमी की पहुंच से सोना धीरे- धीरे अब दूर होने लगा है। ऐसे में महंगे होते सोने को वैज्ञानिकों ने खानों की बजाय इंसानी मल में ढूंढ निकाला है। जी हां इंसानी मल जैसी बेकार चीज में सोने की खोज को लेकर वैज्ञानिकों को कामयाबी मिली है।

है ना अजीब सी बात लगती है लेकिन यह हकीकत है। एक वैज्ञानिक शोध में पाया गया है कि मानव मल में सोना ही नहीं बल्कि कई कीमती धातु पायी जाती हैं। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने इस बात पर मुहर लगा दी है। उन्होंने दावा है किया है कि वे इंसानी मल में सोना निकालने में जुटे हुए हैं।

दरअसल अमेरिकी वैज्ञानिकों को सीवेज संयत्रों से सोना निकालने में सफलता मिली है। किसी सोने की खान (GOLD MINE) में जितना गोल्ड न्यूनतम स्तर पर मिलता है उतनी ही मात्रा में सीवेज से पाया गया है।

अमेरिकन केमिकल सोसायटी की 249 वीं नेशनल कॉन्फ्रेन्स में मानव मल से सोना निकालने पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई है। इस कॉन्फ्रेन्स के दौरान मानव मल से सोने के वृहद् उत्पादन पर भी विचार किया गया है। us geological survey (USGS) के रिसर्चर कैथलीन स्मिथ ने जानकारी दी है कि खनन में न्यूनतम स्तर पर जितना सोना पाया जाता है इंसानी मल मे भी उतना ही सोना पाया गया है।

यही नहीं अमेरिकी रिसर्चर्स ने यह भी कहा है कि मानव मल में सोना ही नहीं चांदी, तांबा के अलावा पैलाडियम तथा वैनेडियम जैसी अति दुर्लभ मैटल्स भी पाई गई है। वैज्ञानिक अनुमान के मुताबिक 10 लाख अमेरिकी जितना मल उत्सर्जित करते हैं, उस मल से 1 करोड 30 लाख डॉलर के मैटल्स का उत्पादन हो सकता है।

बता दें कि अमेरिका में प्रतिवर्ष सीवेज के पानी से 70 लाख टन ठोस कचरा निकाला जाता है। इस कचरे का आधा भाग खाद बनाने में उपयोग किया जाता है जबकि बचा हुआ आधा हिस्सा जला दिया जाता है। जले हुए हिस्से का उपयोग जमीन के गड्ढे भरने में किया जाता है।

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