November 16, 2018
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शशि थरूर ने कहा-हिंदी के रीडर देश में कम लेकिन PM बनने के लिए हिंदी पर पकड़ जरूरी

जनमंथन, जयपुर। सांसद और लेखक शशि थरूर का कहना है कि मैं हिन्दी का विरोधी नहीं हूं, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि हिन्दी सभी भारतीयों की भाषा है। उन्होंने कहा की हिंदी भाषा को लेकर जोशी और शुक्ला के लिए तो आसानी हो जाएगी लिकिन सुबमण्यम और स्वामी परेशान हो जायेंगे।

भारत में बिटिश राज के खिलाफ लिखी गई अपनी किताब “अंधकारकाल” पर आधारित सत्र में बातचीत करते हुए थरूर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी में भाषण दिया जा सकता है, लेकिन उसे समझेगा कौन। अपने वोटरो को कोई संदेश पहुंचाने के लिए वहां हिन्दी में भाषण देना चाहते हैं तो अलग बात है। उन्होंने कहा कि भारत बहुभाषीय देश है और यह नहीं भूलना चाहिए कि भाषा को लेकर दक्षिण भारत में दंगे तक हो चुके हैं और इसी के बाद त्रिभाशा फार्मूला लागू किया गया था।हालांकी इसके साथ ही थरूर में ये स्वीकार किया कि देश के प्रधानमंत्री पद के लिए हिंदी आना जरूरी है।

भारत में ब्रिटिश राज की बात करते हुए शशि थरूर ने कहा कि अंग्रेजों के कारण ही भारत में पहले अकाल के कारण करोडों लोगो की जान गई। बंगाल के अकाल के समय लोग यहां मर रहे थे और अंग्रेज अपने यहां बफर स्टाॅक के लिए यहां का अनाज वहां भेज रहे थे। अंग्रेजों ने ही जलियांवाला बाग जैसी घटना की। मैं मानता हूं कि अंग्रेेज राजपरिवार को यहां जलियांवाला बाग आकर यहां के लोगों से माफी मांगनी चाहिए। इसे लेकर वहां के भारतीय मूल के एक सांसद मुहिम भी चला रहे है। हालांकि लगता नहीं है कि अंग्रेज ऐसा करेंगे, क्योकि उन्हें फिर बहुत देषों चीजों के लिए माफी मांगनी पड जाएगी। लेकिन इसमे कोई षक नहीं है कि अंग्रेजों ने एक पूरी सभ्यता को न सिर्फ लूटा बल्कि बर्बाद कर दिया।कोहीनूर की वापसी के सवाल पर थरूर ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि कोहीनूर वापस हो पाएगा, क्योंकि लंदन में जितने संग्रहालय है, वे बडे चोर बाजार की तरह है जहां पर ज्यादातर चीजें इधर उधर से चुरा कर लाई गई है। अंग्रेज कोहीनूर लौटाएंगे तो उन्हें कई देषों का बहुत कुछ लौटाना पडेगा। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन अपने बच्चो को उपनिवेषकाल के बारे मंें कुछ नहीं पढाता और उस काल की बातें छुपाना चाहता है।

देशभर में जारी कांग्रेस की टैम्पल पॉलिटीक्स को लेकर आज शशि थरूर ने कहा कि देश में दो तरह के हिंदू है एक वो जो घर में मंदिर में पूजा करते है लेकिन ये बात बताते नही है वही दूसरे तरीके के लोग एक पार्टी से जूडे है जो इसका दिखावा करतें है ।लेकिन अब कांग्रेस पार्टी को भी लोगों को बताना पडा रहा है कि वो भी हिदु है इसी के चलते देश अब सबको कांग्रेस की हिदू पॉलिटीक्स दिखायी दे रही हैं।थरूर ने कहा कि वो हिंदूइस्म में भरोसा करते है लेकिन हिदूत्व में वो भरोसा नही करते है।थरूर ने कहा कि चाय पकाडे बेचने वालों को वो बेरोजगार ही मानते है क्योकि जब कोई रोजगार नही मिलता है तो लोगों को मजबूरी मे ये करना होता है।

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