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लेखक और कांग्रेसी नेता शशि थरूर ने कहा- बच्चों पर अपने सपने नहीं थोपें अभिभावक

जनमंथन, जयपुर। देशभर में चिल्ड्रन्स एकेडमी स्कूल संचालित करने वाली संस्था आईएससी स्कूल संघ ने शिक्षा को नैतिक जीवन से जोड़ने का बीड़ा उठाया है। बच्चों में बढते मानसिक दबाव और अवसाद को बाहर करने के लिए चिल्ड्रन्स एकेडमी ने अपना प्रोग्राम तैयार किया है। इसी लक्ष्य को एकेडमी ने जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में अपना 60 वां अधिवेशन आयोजित किया। इस तीन राष्ट्रीय दिवसीय अधिवेशन में शिक्षा, शिक्षण पद्धति और प्रबंधन पद्धति पर विशेष फोकस रहा।

इस राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन कांग्रेस नेता और लेखक शशि थरूर ने किया। शशि थरूर ने कहा कि आज एजुकेशन रिफॉर्म्स के लिए बदलते दौर को ध्यान में रखते हुए शिक्षा प्रणाली की जरूरत है। उन्होंने इस दौरान शशि थरूर ने कहा कि दसवीं कक्षा से ही अपने बच्चों के भविष्य के बारे में गंभीरता लानी चाहिए लेकिन अपने सपनों को उन पर नहीं थोपें। इस मौके पर 2000 से ज्यादा स्कूल प्रिंसिपल्स और टीचर्स मौजूद थे।

अधिवेशन के दूसरे दिन देशभर से शिक्षाविद, स्वास्थ्य संरक्षक और आईडी के धुरंधर सेमिनार में जुटे। इस दौरान आयोजित अलग-अलग सेशन्स में पैनल डिस्कशन्स के जरिए विशेषज्ञों ने अपनी बातें रखीं। वर्धमान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के डायरेक्टर डॉ. जुगल किशोर, बेंगलुरू के डॉक्टर सेंथिल कुमार, जयपुर के विकास गौड़, डॉ. निमाली सिंह और मुंबई की विदूषी डागा इस कार्यक्रम में शामिल हुए। इस मौके पर शिक्षण पद्धति को छात्रों के अनुकूल बनाने के लिए कुछ प्रजेन्टेशन्स भी हुए। जयपुर की डॉक्टर निमाली सिंह ने बच्चों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अभिभावको को बच्चों के खान पान पर विशेष ध्यान देने की अपील की। मुंबई की आईटी विशेषज्ञ विदुषी डागा ने स्टूडेन्ट्स को फेसबुक का इस्तेमाल फेसबुक की तरह ही करने की सलाह दी।

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चिल्ड्रन्स एकेडमी के तीन दिवसीय इस भव्य अधिवेशन में छात्र-छात्राओं ने शानदार कल्चरल प्रस्तुतियां भी दी। छात्राओं ने राजस्थानी नृत्य अलगोजा और कालबेलिया पर जमकर परफोर्मेन्स दी।

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