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RSS चीफ मोहन भागवत ने जयपुर में कहा- हिन्दू का अर्थ पूजा, जाति या भाषा से नहीं, विश्व कल्याण की कला हिन्दू संस्कृति

जनमंथन, जयपुर। राजस्थान में रविवार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर से आयोजित 5 दिवसीय ‘स्वर गोविंदम 2017’ कार्यक्रम का आज समापन हुआ। समापन समारोह जयपुर के वैशाली नगर स्थित चित्रकूट स्टेडियम में हुआ। इससे पहले सुबह से संघ की ओर से कई बडे स्तर के कार्यक्रम आयोजित किए गए। सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने रविवार को संघ के भवन का लोकार्पण भी किया।

इसके बाद देवदत्त और पांचजन्य नाम के दो विशाल पथ संचलन भी आयोजित हुए। ये पथ संचलन निर्वाण नगर और राजेन्द्र नगर से रवाना होते हुए जयपुर के वैशाली नगर स्थित चित्रकूट स्टेडियम में पहुंचे। इस दौरान करीब 1500 से ज्यादा संघ के कार्यकर्ता एकजुट हुए।

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सर संघचालक मोहन भागवत ने इस दौरान ‘स्वर गोविंदम 2017’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि संघ भीड़ खींचने के लिए कार्यक्रम नहीं करता है। उन्होंने कहा कि संघ का हर एक कार्यक्रम मनुष्य के मन और बुद्धि को सुधारने वाला होता है। भागवत ने कहा कि वाद्यों का वादन स्वाभाविक संगीत का कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी में जिसे SOFT POWER कहा जाता है भारत में उसी सॉफ्ट पॉवर का एक घटक शास्त्रीय संगीत है।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संगीत के 7 स्वर होते हैं जिससे पूरा विश्व अवगत है लेकिन इन स्वरों का सही सदुपयोग भारतीय संगीत ही कर पाया है और दूसरा कोई नहीं कर सका है और ना ही कर सकेगा। मोहन भागवत ने कहा कि भारत का संगीत मनुष्य को आध्यात्म, संस्कार, पवित्रता और करुणा की ओर ले जाता है।

मोहन भागवत ने आगे कहा कि हिन्दू संस्कृति विश्व कल्याण चाहने वाली संस्कृति है। उन्होंने कहा कि पाश्चात्यता के प्रभाव से घटती इस भव्य संस्कारों वाली अनूठी हिन्दू संस्कृति को विश्व कल्याण के लिए जीवित रखना है।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथी रिटायर्ड आईएएस और अखिल भारतीय रैगर महासभा के पूर्व अध्यक्ष बीएल नवल थे। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथी समाजसेवी और उद्योगपति किशोर रूंगटा थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, कई प्रख्यात साधु-संत और राजनैतिक पदों से जुड़े लोग भी पहुंचे।

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