November 17, 2018
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सीआरपीसी संशोधन विधेयक पर केन्द्र और राज्य सरकार को HC का कारण बताओ नोटिस, अब आपराधिक परिवाद दायर करेगी आप

जनमंथन, जयपुर। विवादित सीआरपीसी संशोधन विधेयक मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने केन्द्र और राजस्थान सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने केन्द्र और सरकार से कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर इस तरह के कानून की राजस्थान में क्यों जरूरत पड़ी।

इस मामले में आम आदमी पार्टी के विधि प्रकोष्ठ प्रभारी एडवोकेट पूनमचंद भण्डारी और अन्य 6 जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में सीआरपीसी की धाराओँ में संशोधन कर राजस्थान सरकार की ओर से लाए जा रहे दण्ड विधियां राजस्थान संशोधन विधेयक और दण्ड प्रक्रिया संहिता राजस्थान संशोधन विधेयक को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिका में इन कानूनों को न्यायालय की अवमानना बताया गया था।

एडवोकेट पूनमचंद भण्डारी ने कहा है कि राजस्थान सरकार अब इन बिलों को लाने पर झूठी सफाई दे रही है। भण्डारी ने कहा कि CRPC की धारा 156 (3) के दुरुपयोग और 73 फीसदी झूठे मुकदमों की बात बेमानी है। पूनमचंद भण्डारी ने वसुंधरा सरकार को चैलेन्ज किया है कि एक भी ऐसा मामला बताएं जिसमें एक भी इस्तगासा पर रिपोर्ट पेश होने के बाद इन्वस्टिगेशन ऑफिसर ने मामला नहीं बनने की बात कही हो।

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पूनमचंद भण्डारी ने बताया कि इस मामले में अब मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और राजस्थान सरकार के खिलाफ आपराधिक प्रतिवाद (criminal Contempt) दायर करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले एडवोकेट जनरल से अनुमति मांगी जाएगी। एडवोकेट जनरल अनुमति नहीं देंगे तो राजस्थान उच्च न्यायालय में आपराधिक प्रतिवाद दायर किया जाएगा।

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क्या है 156 (3)

दरअसल जब किसी मामले में पुलिस रिपोर्ज दर्ज नहीं करती ऐसे में कोर्ट में 154 (2) सेक्शन के तहत् 190 में इस्तगासा पेश की जाती है। उसको पढने और समझने के बाद जांच जरूरी पाई जाने पर 156 (3) में भेजा जाता है कि एफआईआऱ दर्ज करना जरूरी है।

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