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आप का आरोपः 18 IAS अफसरों को बचाने के लिए राजस्थान सरकार ला रही काला कानून

जनमंथन, जयपुर। सीएम वसुंधरा राजे राजस्थान विधानसभा में सोमवार को जजों, मजिस्ट्रेटों और अन्य सरकारी अधिकारियों, सेवकों को सुरक्षा कवच देने वाले आपराधिक प्रक्रिया (राजस्थान संशोधन) विधेयक-2017 को पेश करेंगी। इस विधेयक के खिलाफ प्रदेश के राजनैतिक संगठनों के साथ ही सामाजिक संस्थाएं आवाज उठा रही है। आम आदमी पार्टी ने इस अध्यादेश को काला कानून बताया है।

आम आदमी पार्टी ने भी राजस्थान सरकार पर सीधे आरोप लगाए हैं कि यह विधेयक राज्य सरकार के डेढ दर्जन आईएएस अधिकारियों को सुरक्षा देने के लिए लाया जा रहा है। आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता एडवोकेट पूनमचंद भण्डारी ने चेतावनी दी है कि इस विधेयक को अगर सदन में लाया गया तो पूरे प्रदेश में इस विधेयक के खिलाफ धरने-प्रदर्शन और अन्य तरीके से आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर राजस्थान सरकार ने मीडिया की कलम को भी रोकने का प्रयास किया तो आम आदमी पार्टी (आप) पंपलेट और अन्य माध्यमों से वसुंधरा सरकार की इस बिल को लाने की मंशा को जनता के सामने लाएगी। उजागर करेगी।

पूनमचंद भण्डारी ने कहा कि इस बिल के लागू होने के बाद अधिकारियों और सांसद, विधायकों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद भी 6 माह तक एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि 6 महिने (180 दिन) के भीतर तो बड़े से बडे मामले को अधिकारी और बडे नेता मैनेज कर सकते हैं।

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पूनम चंद भण्डारी ने कहा कि राजस्थान की भ्रष्ट वसुंधरा सरकार अब राजस्थान से जाने वाली है। भण्डारी ने कहा कि सरकार बडे अधिकारियों की झूठे मुकदमों से बदनामी का बहाना बनाकर खुद बचना चाहती है।

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बता दें कि 6 सितंबर को जारी अध्यादेश आपराधिक कानून (राजस्थान संशोधन) अध्यादेश, 2017 में बदलाव करने के लिए यह नया बिल लाया जा रहा है। इस बिल में सीआरपीसी की धारा 156 में बदलाव करके 156 (3) और 190 (1) को जोड़ा है।

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