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दिलवालों की दिल्ली में इस बार नहीं मनेगी धमाकेदार दिवाली, SC के फैसले पर कई संगठन नाराज

जनमंथन, जयपुर। दिलवालों की दिल्ली इस बार धमाकेदार नहीं मनेगी। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और एनसीआर (NCR) से जुड़े इलाके में पटाखे बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया है। 31 अक्टूबर तक यह प्रतिबंध रहेगा। न्यायालय ने पटाखों पर रोक लगाते हुए अपने पिछले साल के आदेश को बहाल किया है। हांलाकि कई सामाजिक, व्यवसायिक संगठन और लेखक तक इस फैसले पर एतराज जता रहे हैं। लेखक चेतन भगत ने अपने ट्वीट में कहा है कि पटाखों बिना दिवाली का क्या मतलब?

इम्पीरियल चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महानिदेशक सुनील गोयल ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि कानून बनाने का काम कोर्ट का नहीं है। सुनील गोयल के मुताबिक कानून बनाने का काम पार्लियामेन्ट का होता है। उन्होंने यह भी कहा कि दीपावली पर 2 से 3 तीन दिन चलने वाले पटाखों पर रोक लगाने से दिल्ली में हो रहे प्रदूषण में कोई ज्यादा फर्क नहीं पडने वाला। गोयल ने कहा कि वाहनों से सबसे ज्यादा प्रदूषण हो रहा है लेकिन उसके लिए भी विरोधाभास है। सुनील गोयल ने कहा है कि दुपहिया और चौपहिया वाहनों को पॉल्यूशन क्लीयरेंस लेना जरूरी है जबकि निजी बसों, रोडवेज बसों और ट्रकों से कोई पॉल्यूशन क्लीयरेंस नहीं मांगता।

सुनील गोयल ने कोर्ट के इस फैसले पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि हिन्दू समाज में हजार साल से चली आ रही परंपरा को इस तरह रोकना ठीक नहीं। उन्होंने कहा कि यह जनभावना के साथ खिलवाड़ है। गोयल ने कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले दिनों में जरूरी नहीं कि पटाखों के बाद धार्मिक हवन और दाह संस्कार पर भी सुप्रीम कोर्ट रोक लगा दे।

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गौरतलब है कि सेन्ट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार 2 नवंबर 2016 को दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स 494 तक पहुंच गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर के बाद दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में पटाखा बिक्री पर रोक लगा दी थी, बाद में 12 सितंबर को कुछ शर्तें तय करके यह रोक हटा दी गई है। अभी हाल ही में अर्जुन गोपाल नाम के व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए इस रोक को सुप्रीम कोर्ट ने फिर से बहाल किया है।

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