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निर्भया गैंगरेप और गैंगस्टर आनंदपाल केस के चर्चित वकील एपी सिंह पर भी बन चुकी है फिल्म

जनमंथन, नई दिल्ली। कानूनी दांवपेंचों की रोचकता शुरु से ही फिल्मी पर्दे पर हिट रही है। बायोपिक फिल्मों के जमाने में अब देश के चर्चित मुकदमों पर बनी फिल्में भी पर्दे पर धूम मचाने लगी है। समय के साथ देश के चर्चित मुकदमों में अपनी पूरी ताकत झोंक देने वाले वकील भी चर्चाओँ में रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं सीनियर एडवोकेट एपी सिंह। निर्माता, निर्देशक अभिषेक बिंदल ने साल 2014 में अपनी फिल्म “मैनू एक लड़की चाहिए” में देश के एक चर्चित मुकदमे के वकील एपी सिंह के किरदार को जीवंत करने का प्रयास किया था। फिल्म में दिखाया गया था कि वे अपने मुवक्किल की पैरवी करने के लिए किस हद तक गुजर जाते हैं।

दिल्ली के निर्भया गैंगरेप केस में एपी सिंह ने दोषियों की ओर से पैरवी की थी। देश और समाज को झकझोर कर रख देने वाले इस केस में पूरा देश दिवंगत निर्भया के साथ ही खडा था। इस केस ने देश के कई तत्कालीन कानूनों में बदलाव करने और उन्हें सख्त करने के लिए सरकार को भी मजबूर कर दिया था। आखिरकार जीत निर्भया पक्ष की ही हुई और दोषियों को सजा हुई।

खास बात जो रही वो यह थी कि आरोपियों की ओर से केस लड़ रहे वकील एपी सिंह ने अपने मुवक्किल का मुश्किल से मुश्किल घड़ी मे साथ नहीं छोड़ा था। दोषियों को फांसी से बचाने के लिए एपी सिंह ने कोर्ट में कई दलीलें दीं। हारे हुए केस में भी उन्होंने अपनी पूरी जान फूंक दी थी। अभिषेक बिंदल की फिल्म तो 2014 में ही रिलीज हो गई थी लेकिन निर्भया गैंगरेप केस का फैसला 5 मई 2017 को आया। सुनवाई के दौरान जहां एपी सिंह ने गहरे तर्क दिए वहीं गांधीवाद की दुहाई भी दी। न्यायालय का फैसला आने के बाद भी एपी सिंह ने इस फैसले पर मीडिया के सामने सवाल खडे कर दिए थे।

कुछ ऐसा ही ताना बाना बुनकर निर्माता निर्देशक अभिषेक बिंदल ने फिल्म “मैनू एक लड़की चाहिए” बनाई थी। हांलाकि फिल्म की पटकथा के अनुसार फिल्म का नाम किसी भी तरह से सरोकार नहीं रखता था। फिल्म के अभिनेता रघुवीर यादव ने अपने किरदार को जिंदा रखने में जान फूंक दी थी लेकिन कमजोर निर्देशन और कमजोर स्क्रिप्ट ने फिल्म को बेअसर बना दिया था। फिल्म की कहानी और क्लाइमैक्स में भी किसी भी तरह का तारत्मय नहीं था।

बता दें कि निर्भया हत्याकांड के अलावा राजस्थान के बहुचर्चित गैगस्टर आनंदपाल केस में भी एपी सिंह वकील रहे हैं। हत्या, लूट, डकैती और गैंगवार की वारदातों के मामलों में आनंदपाल पर कई मुदकमें चल रहे थे। जेल से फरारी काट रहे आनंदपाल को जब राजस्थान की पुलिस सूंघती हुई घूम रही थी इस दौरान एडवोकेट एपी सिंह ने आनंदपाल का पक्ष केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पास जाकर भी रखा था।

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हांलाकि राजस्थान विधानसभा में चर्चाओं में रहे इस मामले का अंत आनंदपाल के एनकाउंटर के साथ हुआ था। गैंगस्टर आनंदपाल के एनकाउंटर के बाद भी एनकाउंटर को फेक बताने, मामले की सीबीआई जांच कराने और आनंदपाल के परिवार को न्याय नहीं मिलने तक उसके शव को नहीं उठाने तक का काम वकील एपी सिंह के इशारे पर हुआ था।

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