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किसान महापंचायत करेगी राजस्थान में किसान आंदोलन का शंखनाद, आंदोलन से पहले 25 से 27 अगस्त तक जयपुर में कार्यशाला

जनमंथन, जयपुर। राजस्थान में संभावित किसान आंदोलन जल्द ही जोर पकड़ सकता है। किसान महापंचायत ने किसान आंदोलन का शंखनाद कर दिया है। हांलाकि किसान महापंचायत ने अभी इस आंदोलन को व्यापक रुप देने के लिए 39 किसान संगठनों की कार्यशाला बुलाई है। दो दिवसीय यह कार्यशाला 25 अगस्त से 27 अगस्त तक किसान भवन में आयोजित होगी।

इस कार्यशाला का प्रमुख एजेंडा राजस्थान के “किसानों की आय” रखा गया है। कार्यशाला के दौरान 7 सेशन्स होंगे। कार्यशाला में साढ़े 10 घंटे तक किसानों की समस्याओं और वसुंधरा सरकार की किसान विरोधी नीतियों पर चर्चा की जाएगी। अलग-अलग सेशन्स में किसान आंदोलनों के इतिहास, वर्तमान में चल रहे श्रण मुक्ति और गांव बंद आंदोलन की समीक्षा, देश की खुशहाली के लिए कानून की भूमिका “किसानों की सुनिश्चित आय और मूल्य अधिकार विधेयक-2012” पर और देश के विकास मॉडल पर चर्चा भी चर्चा की जाएगी।

कई विशेषज्ञ और कानून के जानकार जुटेगें किसानों की कार्यशाला में
इस कार्यशाला में उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधिपति विनोद शंकर दबे, प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य रह चुके प्रोफेसर विजय शंकर व्यास, पूर्व केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री सोमपाल शास्त्री, कृषि विशेषज्ञ और विष्लेषक देवेन्द्र शर्मा, पूर्व कुलपतियों में प्रोफेसर बीएल वर्मा, प्रोफेसर गंगाराम जाखड़, सेवानिवृत आईएएस महावीर सिंह, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक बी.आर ग्वाला, अभिनव भारत के अशोक चौधरी शामिल होंगे।

समर्थन मूल्य तय नहीं करने में सरकार कर रही देरी
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा कि राजस्थान में कई फसलें कटने का समय आ गया है लेकिन राज्य सरकार ने अभी तक समर्थन मूल्य तय नहीं किया है। उन्होंने बताया कि बाजरा, मक्का, मूंग, मोठ, ग्वार, और मूंगफली की फसलें कटने में कुछ ही महिने बाकि रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बिना नोटिफिकेशन जारी किए मुंह जुबानी कह रही है कि समर्थन मूल्य तक कर दिया गया है। जाट ने बताया कि प्रदेश के किसानों के साथ यह कुठाराघात है।

सुनिएः क्या कहा किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट ने-

पूंजीपतियों के फायदे के लिए नहीं कर रही सरकार समर्थन मूल्य तय
रामपाल जाट ने आरोप लगाया कि किसानों को गुमराह करने के लिए अगर समर्थन मूल्य तय भी होते हैं तो तय मापदंडों के आधार पर नहीं होते। उन्होंने कहा कि बड़े उद्योगपतियो और पूंजीपतियों को पोषित करने के लिए कृषि उपजों की लागत में कटौती कर समर्थन मूल्य तय किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि 95 फीसदी किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य के लाभ से वंचित हैं।

किसान महापंचायत का सरकार को दी 31 अगस्त तक का अल्टीमेटम
किसान महापंचायत ने राजस्थान सरकार को चेतावनी दी है कि अगर 31 अगस्त तक सरकार की ओर से पहल नहीं की गई तो राजस्थान के किसानों के पास आंदोलन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा। कड़ी चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को राजस्थान सरकार कभी भुला नहीं पाएगी।

सितंबर में जिला, तहसील और पंचायत स्तर तक होंगे धरने-प्रदर्शन
जाट ने बताया कि सितंबर के पहले हफ्ते से सभी जिलों में किसानों की समस्याओं और मांगों को लेकर ज्ञापन दिए जाएंगे। इसके अलावा प्रदेश व्यापी किसान अधिकार यात्रा भी आयोजित की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिला, तहसील, ग्राम पंचायत स्तर पर जागरण सभाएं और धरना प्रदर्शन लगातार जारी रहेंगे।

सितंबर में सघन धरना और विरोध प्रदर्शनों के बाद किसान महापंचायत द्वारा 15 दिसंबर से 23 दिसंबर तक आंदोलन को नई दिशा दी जाएगी। इस दौरान ऋण मुक्त किसानों के लिए 15 से 21 दिसंबर तक गांव बंद आंदोलन का आगाज होगा। इस दौरान सब्जी. फल, दूध और अन्य कृषि उत्पादों के साथ ही ग्रामीण और किसानों के आवागमन तक पर रोक लगाने की रणनीति बनाई गई है।

ये रहेंगे आंदोलन के कार्यक्रमः
-15 दिसंबर को अनाज मंडियों में अनाज नहीं बिकेगा।
-16 दिसंबर को सब्जी मंडियों में सब्जी, फल-फूल की बिक्री नहीं होगी।
-17 दिसंबर को किसी भी डेयरी पर या गांव से दूध बाहर बिकने के लिए नहीं जाएगा।
-18 दिसंबर को गांव का व्यक्ति गांव में ही रहेगा बाहर नहीं जाएगा।
-19, 20 और 21 दिसंबर को गांवों से कृषि उत्पाद, दूध और ग्रामीण बाहर नहीं जाएंगे।
-23 दिसंबर को 45 हजार गांवों के किसान जुटेंगे और आगे के आंदोलन की रणनीति बनाएंगे।

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