November 17, 2018
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सिरोही की सरकारी अर्बुदा गौशाला में 20 गायों की हुई मौत, नहीं चेती सरकार

जनमंथन, सिरोही। राजस्थान में गायों पर संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। जयपुर की हिंगोनिया गौशाला के बाद गायों की मौत पर उठा बवाल जैसे-तैसे सरकार ने शांत कर दिया लेकिन हालात सुधरने की बजाय बिगड़ ही रहे हैं। राजस्थान के सभी जिलों की गौशालाओं के हाल एक जैसे ही हैं। ताजा मामला सिरोही जिले का है। सिरोही जिले की इकलौती सरकारी अर्बुदा गौशाला में 7 दिन में 20 गायों की मौत होने काम बड़ा मामला सामने आया है। इस गौशाला में रह रहीं कई गायें बीमार हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह गौशाला राज्य के गौपालन राज्य मंत्री ओटाराम देवासी के विधानसभा क्षेत्र में आती है।

सरकारी अर्बुदा गौशाला में एक साथ 20 गायों के मरने के बाद फिर से कहीं न कहीं सरकारी इंतेजामों की पोल खुल गई है। गौ संरक्षण के नाम पर बनाया गया गौपालन विभाग पूरी तरह से नाकारा साबित हो रहा है। बारिश का मौसम है इसके बाद भी अर्बुदा गौशाला की गायों को जंगल में चराने ले जाया जाता है। हांलाकि गौशाला में सूखे चारे का अच्छा भण्डार है लेकिन गायों को बाहर चरने के लिए भेजा जाता है जिसके चलते बारिश के कीचड़ में फंसकर गायें दम तोड़ रही हैं।

जानकारी के मुताबिक गौशाला की 16 गायों ने गौशाला में ही दम तोड़ा है जबकि अन्य 4 गायें बाहर दलदल में फंसकर मरी हैं। ज्यादातर गायें यहां बीमार हो रही हैं। अर्बुदा गौशाला में साफ-सफाई की कमी और टीनशेड नहीं होने के चलते बारिश के पानी और कीचड़ से गायों में कई तरह के रोग लग गए हैं।

इसी अर्बुदागोशाला में अभी 10 दिन पहले ही सूखे चारे के की कमी से पांच गायों ने दम तोड़ दिया था। मीडिया की ओर से यह मामला उटाए जाने के बाद सूखे चारे की तो व्यवस्था कर दी गई लेकिन फिर भी बीमार गायों को बारिश में चारे के लिए गौशाला से बाहर धकेला जा रहा है।

इस घटना के बाद तहसीलदार वीरभद्रसिंह चौगान ने गौशाला का मौका मुआयना भी किया। इस दौरान उन्होंने बीमार गायों के लिए दलिये की व्यवस्था और चिकित्सकीय दल बुलाकर गायों का इलाज भी शुरु करवा दिया है।

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