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सदियों पुराने देवी मां के इस चमत्कारी मंदिर में पीढियों से हैं मुस्लिम पुजारी

जनमंथन, जोधपुर। जोधपुर जिले के भोपालगढ इलाके के बागोरिया गांव में देवी मां का एक चमत्कारी मंदिर है। सदियों पुराने इस मंदिर में एक मुस्लिम परिवार ही तेरह पीढियों से पुजारी का काम करता है। इस मंदिर में अभी पुजारी का काम जमालुद्दीन संभालते हैं। बताया जाता है कि करीब 600 साल पहले सिंध प्रांत में घोर अकाल पड़ा था। इसी दौरान इस मुस्लिम पुजारी परिवार के पूर्वज यहां आकर बस गए थे।

यह पुजारी परिवार मंदिर में देवी मां की पूजा-उपासना करता है तो साथ ही रोजा भी रखता है। माता के मंदिर के मौजूदा पुजारी जमालुद्दीन ने बताया कि मंदिर का पुजारी बनने के बाद उनके परिवार का सदस्य नमाज अदा नहीं करता है।बागोरिया गांव के लोगों के मुताबिक देवी मां का यह मंदिर अति प्राचीन, रहस्यमयी और चमत्कारी है। इस चमत्कार का गवाह सबसे पहले यह मुस्लिम परिवार ही बना था।

कहा जाता है कि करीब 600 साल पूर्व सिंध में जोरदार अकाल पड़ गया था। अकाल की वजह से वहां के मुस्लिम परिवार मालवा मध्यप्रदेश की ओर निकल पड़े। इन मुस्लिम परिवारों में ही मां के पुजारी जमालुद्दीन के पूर्वज भागे खां भी थे जिनके ऊंट का रास्ते में पैर टूट गया। ऊंट के पैर टूटने के बाद भागे खां और उनके परिवार ने बागोरियां गांव की पहाड़ियों में ही रात गुजारी थी। रात को सोते समय भागे खां को सपने में देवी मां ने दर्शन दिए और बावड़ी से प्रतिमा निकालकर पूजा करने को कहा। इसके साथ ही देवी मां ने भागे खां को अनुष्ठान की भभूत ऊंट को लगाने को भी कहा।

सपने के मुताबिक भागे खां ने बावड़ी में खोज की तो देवी मां की मूर्ति निकली जिसकी उन्होंने पूजा की। साथ ही भागे खां ने मां के अनुष्ठान की भभूत ऊंट को लगाई तो वह ठीक होकर खड़ा हो गया। मां के इस चमत्कार को देखकर यह मुस्लिम परिवार आगे नहीं गया और यहीं बस गया। तब से आज तक इस मुस्लिम परिवार का सदस्य ही देवी मां के मंदिर में पुजारी का काम करता है।

बागोरिया गांव के लो बताते हैं कि जमालुद्दीन नवरात्रा में घऱों में जाकर हिन्दू मान्यताओं के अनुसार संपूर्ण विधि विधान से हवन और अनुष्ठान करवाते हैं। पुजारी जमालुद्दीन कहते हैं कि यहीं मां का आदेश है। जमालुद्दी नवरात्रों में पूरे 9 दिन व्रत रहते हैं और इस दौरान वे मंदिर में रहकर ही देवी मां की भक्ति करते हैं।

देवी मां के इस मंदिर से जुड़े कई चमत्कार भी सुनने को मिलते हैं। स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि अगर देवी मां किसी बात से नाराज हो जाती है तो मंदिर के समीप मौजूद बावड़ी का पानी पूरी तरह से लाल रंग ले लेता है। इसके बाद गांव में देवी मां के भजन-कीर्तन का दौर चलता है। मंदिर में लोग मां से शांत और प्रसन्न रहने की विनती करते हैं तब पानी का रंग साफ हो जाता है। इसी तरह कहते हैं कि भागे खां का ऊंट जब मर गया था तो उसकी खाल उतारने पर बड़ा चमत्कार देखने को मिला था। जिस पैर पर देवी मां की भभूत लगाई गई थी व चांदी कि सलाईयों में बदल गई थी।

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