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जीएसटी के तकनीकी जिन्न ने व्यापारियों की नींद उड़ाई, केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री ने लिया फीडबैक

जनमंथन, जयपुर। गुड्स एंण्ड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) 1 जुलाई से पूरे देश में लागू हो चुका है, लेकिन जीएसटी का तकनीकी जिन्न देशभर के व्यापारियों को सोने नहीं दे रहा है। “तकनीक की जानकारी के अभाव में कहीं गलती नहीं हो जाए, कहीं टैक्स चुकाने में ज्यादा नुकसान नहीं हो जाए या देरी होने पर जुर्माना नहीं लग जाए और इस व्यवसाय में अब जीएसटी लगने के बाद फायदा है या इसे बंद कर दिया जाए”। ऐसे ही कई सवालों ने व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। राजस्थान के व्यापारियों का भी कुछ ऐसा ही हाल है।

जानिएः जीएसटी के बाद क्या हुआ महंगा

सरकार इस नई टैक्स व्यवस्था को आजादी के बाद का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार कहकर प्रचारित कर रही है लेकिन व्यापारी डरे हुए हैं। इसी मामले में शनिवार को केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने जीएसटी विभाग से संबंधित अधिकारियों की मीटिंग ली। इस मीटिंग में उन्होंने अधिकारियों से जीएसटी को लेकर फीडबैक लिया। इस दौरान अर्जुनराम मेघवाल तमाम व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों से भी मुखातिब हुए और जीएसटी में आ रही समस्याओं और उनके समाधान के सुझाव भी लिए।

जानिएः जीएसटी के बाद क्या हुआ सस्ता

अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि जीएसटी फिलहाल शुरुआती दौर में है और यह पूरी तरह से तकनीक पर आधारित है। मेघवाल ने कहा कि व्यापारियों के साथ ही सरकार के अधिकारियों को भी अभी परेशानी का सामाना करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने एक राष्ट्रव्यापी टीम गठित कर एक मिशन की शुरूआत की है जिसमें 150 से ज्यादा अधिकारी और चालीस से ज्यादा मंत्री शामिल हैं। मेघवाल ने बताया कि यह मंत्री और अधिकारियों की टीम जीएसटी में व्यापारियों और विभागीय अधिकारियों की समस्याओं का फीडबैक जीएसटी काउंसिल को देगी।

केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल की अध्यक्षता में हुई इस मीटिंग में जीएसटी विभाग की चीफ कमिश्नर सीमा मलिक, कमिश्नर आशुतोष बरनवाल, राज्य के वित्त सचिव प्रवीण गुप्ता, वाणिज्यकर आयुक्त आलोक गुप्ता सहित कई अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने मेघवाल को समस्याओं से संबंधित ज्ञापन भी दिया।

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