याद करना होगा अब आसान, मेमोरी गुरू कुंजेश देंगे मेमोरी की अचूक थैरेपी - Jan Manthan : latest news In Hindi , English
breaking news जयपुर देश राजस्थान लाइफस्टाइल

याद करना होगा अब आसान, मेमोरी गुरू कुंजेश देंगे मेमोरी की अचूक थैरेपी

जनमंथन, जयपुर। मुझे मैथ मैटिक्स (math mastics) और फिजिक्स के न्यूमैरिकल अच्छे नहीं लगते, मुझे केमिस्ट्री के फॉर्मूलाज बार- बार याद करने पर भी भूल जाता हूं , मैं कोई भी चीज रखकर भूल जाती हूं। मेरे एटीएम पिन बार-बार भूल जाता हू। अमूमन ये बातें हमारी लाइफ स्टाइल का हिस्सा बनती जा रही हैं ओर रोजमर्रा सुनने को मिलती हैं। वजह साफ है लाइफ स्टाइल (Life style) बदली है जिसमें तकनीक का बेजां इस्तेमाल होने लगा है।

बदलते दौर की जरूरत भी सिर्फ तकनीक है। जो तकनीक की बारीकियों को अपने मस्तिष्क में संजोये रखता है वही दुनियाभर के लिए नजीर बन जाता है। इसीलिए न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बल्कि जीवनशैली को आसान बनाने के लिए भी आज मेमोरी बहुत जरूरी हो गई है।

अब देश के युवाओं को तकनीक का महारथी बनाने के लिए मेमोरी के बादशाह कुंजेश शर्मा एक नया प्रोजेक्ट (Project) लेकर आ रहे हैं। इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड होल्डर कुंजेश शर्मा ने मेमोरी (memory) के गूढ़ रहस्यों को वैदिक सभ्यताओं के गहन अनुसंधान के बाद खोज निकाला है।

इन अद्भुत रहस्यों के उजागर होने के बाद दुनियां में कुशाग्र बुद्धि और कमजोर बुद्धि की अवधारणाएं बदल जाएंगी। इस प्रोजेक्ट के जरिए कुंजेश बताएंगे कि कैसे एक सामान्य सा छात्र (Student) देश या दुनियां में इन्टेलीजेन्सी (intelegency) की मिसाल पैदा करके नजीर बन सकता है।

memory5

कुंजेश का कहना है कि आज लाइफ स्टाईल दिनों दिन फास्ट होती जा रही है। कुंजेश ने कहा कि टेक्नोलॉजी (technology) का अब ज्यादा यूज़ हो रहा है। किसी भी विषय पर काम करते हुए दिन भर में बहुत सारा डाटा कंप्यूटर में सुरक्षित (Save) करना आम हो गया है। उन्होंने बताया कि इस नई कार्यप्रणाली ने व्यक्ति के मस्तिष्क (Human brain) की टेक्नोलॉजी को लुप्त करना शुरु कर दिया है।

कुंजेश के मुताबिक MBBS, Engineering और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर परिणाम के लिए स्टडी डाटा सुरक्षित करने से ही काम नहीं चलता बल्कि स्टडी मैटेरियल के तौर पर सुरक्षित उस डाटा को याद रखना भी जरूरी है। कुंजेश ने कहा- इसीलिए मेमोरी को स्ट्रॉंग बनाना बेहद जरूरी है। कुंजेश के मुताबिक बादाम खाने या किसी भी दवा का सेवन करने से मेमोरी को शार्प नहीं किया जा सकता बल्कि मेमोरी के रहस्यो को जानकर ही याददाश्त को तेज किया जा सकता है।

कुंजेश ने कहा कि देश और दुनियां में नित नए वैज्ञानिक शोध (research) हो रहे हैं और इसके साथ ही कई नई खोज (discovery) हो रही हैं, तकनीक भी तेजी से बढती जा रही हैं, इतिहास में नई घटनाएं शामिल होती जा रही हैं। राजनीति, अर्थव्यवस्था में भी नए बदलाव आ रहे हैं। कुंजेश ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में भविष्य बनाने से पहले नई पीढी को पुराने और नए शोधों, खोजों, घटनाओं, आर्थिक राजनीतिक बदलावों को याद रखना जरूरी हो गया है। यानि सिलेबस लंबा (lengthy) होता जा रहा है। ऐसे में अब जरूरी है शिक्षा की अंग्रेजी पद्धति को छोड़कर वैदिक पद्धति के गुर सीखने की। कुंजेश ने बताया कि आज से 3500 साल पहले भारत के ऋषि, मुनियों ने भी मेमोरी पर जबरदस्त काम किया।

new memory

उन्होंने कहा कि मेमोरी की आधुनिक और वैदिक दोनों ही पद्धतियों को मिला दिया जाए तो आश्चर्यजनक परिणाम सामने आते हैं। कुजेंश शर्मा ने बताया कि लंबे अरसे उनकी टीम के एक्सपर्ट्स मिलकर एक ऐसा कोर्स बनाने जा रहे हैं जो बच्चों की याददाश्त को तेज करने के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने में रामबाण साबित होगा। इस कोर्स में उन प्राचीन वैदिक पद्धतियों का उल्लेख है जो आज से 3500 साल पहले भारतीय गुरुकुलों में शिष्यों को याद करवाने में प्रयोग में ली जाती थी। उन्ही वैदिक पद्धतियों से अब हर विद्यार्थी रहस्यों को समझ पाएगा। कुंजेश ने बताया कि उनके मेमोरी एक्सपर्ट माइंड ट्रेनर युद्ध स्तर पर इस प्रोजेक्ट में जुटे हैं।

Related posts