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January 10, 2019
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MP किसान आंदोलन में भड़की हिंसा, मंदसौर में पथराव-फायरिंग में 5 की मौत, कर्फ्यू लगाया

जनमंथन, इंदौर। मध्य प्रदेश में जारी किसान आंदोलन ने हिंसक रुप ले लिया है। मंगलवार को मंदसौर किसान आंदोलनकारियों ने 10 वाहनों को आग लगा दी जिसमें 8 ट्रक और 2 मोटरसाइकिलें शामिल हैं। इस दौरान आंदोलनकारियो ने पुलिस और सीआरपीएफ पर भी जमकर पथराव किया ।
इस दौरान सीआरपीएफ की ओर से जवाबी कार्रवाई में 5 लोगों की मौत हो गई। हालात नियंत्रण से बाहर देखते हुए शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया है। एमपी के गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह के बताया कि पुलिस या सीआरपीएफ ने किसी भी तरह की फायरिंग नहीं की है।

इस घटना को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार का देश के किसानों से युद्ध करार दिया है। गौरतलब है कि कर्ज माफी सहित कई मांगों को लेकर किसान आंदोलनरत है। हांलाकि एक धड़े का सरकार से समझौता हो चुका है लेकिन बावजूद इसके एमपी में हिंसा जारी है। रतलाम में भी रविवार को पथराव में एक सब इंस्पेक्टर को अपनी आंख गंवानी पड़ी थी।

मंगलवार को हुई घटना का पूरा वृतान्त….
मंगलवार को एमपी के मंदसौर-नीमच रोड़ पर आंदोलनरत लगभग 1 हजार किसानों ने चक्काजाम कर दिया था। इस दौरान किसानों ने 8 ट्रकों और 2 मोटरसाइकिलों को भी आग के हवाले कर दिया। पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने हालात काबू में करने का प्रयास किया तो भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। जवाबी कार्रवाई में सीआरपीएफ ने भी फायरिंग कर दी। फायरिंग में 5 लोगों की मौत हो गई। फायरिंग में मारे गए लोगों में लोद पिपलिया निवासी कन्हैयालाल पाटीदार, टकरावद निवासी कन्हैयालाल पाटीदार, नयाखेडा निवासी चैनाराम पाटीदार, बरखेड़ापंथ निवासी अभिषेक पाटीदार और सत्यनारायण पाटीदार हैं।

हिसंक हालातों को देखते हुए मंदसौर में सोमवार को इंटरनेट पर रोक लगा दी गई थी । फायरिंग की घटना के बाद जिला कलेक्टर ने इलाके में कर्फ्यू लगा दिया। सूचना यह भी मिली है कि एक पुलिस चौकी और बैंक में भी इस दौरान आग लगाई गई है।

इधर फायरिंग में मारे गए लोगों के परिवारों को मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने 5-5 लाख रुपये और घायलों को एक- एक लाख रुपये की मदद की घोषणा की है। साथ ही मुख्यमंत्री ने मंदसौर में हुई फायरिंग की इस घटना की ज्युडिशियल इक्वॉयरी के आदेश भी जारी किए हैं। इस मामले में मध्यप्रदेश के गृहमंत्री भूपेन्द्रसिंह का कहना है कि पिछले छह दिनों से आंदोलन को हिंसक बनाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस धैर्य से काम कर रही है लेकिन असामाजिक तत्वों से सख्ती से निपटने के आदेश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि 32 सूत्रीय मांगों को लेकर मध्यप्रदेश में किसान आंदोलनरत हैं। किसान नेता केदार पटेल और जगदीश रावलिया के अनुसार सोमवार को उनकी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से बातचीत हुई थी जिसमें कुछ मांगों पर सहमति भी बन गई थी।

इन मांगों को लेकर हिंसक हुए हैं मध्यप्रदेश के किसान
1. किसानों की प्रमुख मांगों में मध्यप्रदेश सरकार ने नए कानून में किसानों की जमीन का अधिग्रहण करने की मुआवजे की धारा 34 को हटा दिया था। भू अर्जन मामले में किसानों के कोर्ट जाने का अधिकार छीन लिया था। किसानो की मांग है कि किसान विरोधी इस काले कानून को हटाया जाना चाहिए।

2. किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू कराने की भी मांग कर रहे हैं। जिसके मुताबिक किसी भी फसल पर जितना खर्च आता है। सरकार उसकी डेढ़ गुना कीमत दिलाना तय करेगी।

3. इसके अलावा किसानो की कर्जमाफी और सरकारी डेयरी से दूध खरीद की कीमत बढाई जाने संबंधी मांगें है।

4. किसान आंदोलन में जिन किसानों के खिलाफ मामले दर्ज हैं उन्हें वापस लेने की भी किसानों ने मांग की है।

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