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राजस्थान मंत्रिमण्डल की बैठक में हुए कई अहम् फैसले, दो से ज्यादा संतान वाले राज्यकर्मियों को राहत

जनमंथन, जयपुरए 27 अप्रेल। मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे की अध्यक्षता में गुरुवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में मंत्रिमण्डल की बैठक हुई। इस बैठक में इन्दिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) के जीर्णोद्धार के लिए 3 हजार 291 करोड़ रुपये का ऋण लेने, पंचायती राज विभाग के तृतीय श्रेणी शिक्षकों के माध्यमिक शिक्षा विभाग में स्थानान्तरण के लिए अनुभव सीमा घटाने और 2 से ज्यादा संतान वाले राज्यकर्मियों को राहत देने सहित कई अहम् फैसले हुए।

सार्वजनिक निर्माण एवं परिवहन मंत्री यूनुस खान ने मंत्रिमण्डल की बैठक में हुए निर्णयों की मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि आईजीएनपी में पिछले 55 सालों में लगातार पानी के चलने से मुख्य नहर और फीडर नेटवर्क क्षतिग्रस्त हुआ है। उन्होंने कहा कि इस वजह से नहरों की जल प्रवाह क्षमता 18 हजार 500 क्यूसेक से घटकर करीब 11 हजार 500 क्यूसेक रह गई है। उन्होंने बताया कि नहरों से रिसाव के चलते कई जगह सेम की समस्या भी पैदा हो चुकी है। खान ने बताया कि इन्दिरा गांधी परियोजना की मुख्य नहर और फीडर नेटवर्क की रिलाइनिंग के साथ ही मरम्मत के लिए बड़ी धनराशि की जरूरत थी। इसके लिए राजस्थान जल क्षेत्र पुनः संरचना परियोजना- रेगिस्तान क्षेत्र के अंतर्गत 3 हजार 291 करोड़ रुपये का ऋण न्यू डवलपमेंट बैंक से लेने के की स्वीकृति दी गई है। इस ऋण के जरिए नहरों के जीर्णोद्धार और रिलाइनिंग के साथ ही सेम प्रभावित 7 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई योग्य बनाया जाएगा। यूनुस खान ने कहा कि इसी साल अक्टूबर माह तक प्रोजेक्ट रिपोर्ट और टेंडर प्रक्रिया पूरी कर काम शुरू कर दिया जाएगा।

42 हजार 249 तृतीय श्रेणी शिक्षकों के पद भरे जा सकेंगे
इसके अलावा मंत्रिमंडल की बक में पंचायती राज विभाग में नियुक्त तृतीय श्रेणी शिक्षकों को माध्यमिक शिक्षा विभाग में स्थानान्तरित करने का अहम् फैसला लिया गया। इसके लिए मंत्रिमण्डल ने राजस्थान शिक्षा अधीनस्थ सेवा नियम.1971 में संशोधन किया जाएगा। संशोधन के बाद न्यूनतम अनुभव की अवधि पांच साल से घटाकर तीन साल करने को मंजूरी दी गई है। वर्तमान में माध्यमिक शिक्षा विभाग में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के 42 हजार 249 पद खाली पड़े हैं। इस निर्णय से इन रिक्त पदों को पंचायती राज विभाग के तृतीय श्रेणी शिक्षकों से भरा जा सकेगा।

दो से ज्यादा संतान वाले राज्यकर्मियों को राहत
बैठक में राजस्थान सिविल सेवा नियमों में संशोधन कर दो से ज्यादा संतान वाले राज्यकर्मियों को राहत देते हुए नियुक्ति के पांच साल तक पदोन्नति और एसीपी का लाभ नहीं देने की सीमा को घटाकर तीन साल किया गया है। यह निर्णय 1 जून 2002 को या उसके बाद 2 से ज्यादा संतान वाले कर्मियों को राहत प्रदान देगा। मंत्रिमण्डल ने राजस्थान सिविल सेवा पेंशन नियम.1966 के नियम 77 में संशोधन की स्वीकृति भी दी है। इसके मुताबिक अनुकम्पात्मक नियुक्ति प्राप्त करने वाले पारिवारिक पेंशनरों की प्रोबेशन अवधि समाप्त होने के बाद मूल वेतन पर महंगाई भत्ता या पारिवारिक पेंशन पर महंगाई राहत मिलेगी।

मंत्रिमण्डल के एक अन्य निर्णय के अनुसार राजस्थान सिविल सेवा ;पुनरीक्षित वेतनद्ध नियम.2008 में संशोधन कर पुजारी के पद पर ग्रेड.पे 1700 रुपये की जगह 1750 रुपये किए जाने पर स्वीकृति दी। यह निर्णय पुजारी और सेवागीर के पदों पर वेतनमान का ग्रेड.पे एक समान होने के कारण किया गया है। पुजारी के 50 फीसदी पदों पर नियुक्ति सेवागीर से पदोन्नत कर की जाती है। मंत्रिमण्डल की बैठक में चिमनपुरा कस्बे में नवीन परिसर में संचालित राजकीय महाविद्यालय का नाम बाबा नारायणदास राजकीय कला महाविद्यालय, चिमनपुरा करने की मंजूरी भी दी गई। यह नाम परिवर्तन मई 2015 में नवसृजित विज्ञान और वाणिज्य महाविद्यालय का स्थान परिवर्तन कर इसे पुनः पुराने परिसर में स्थानान्तरित करने के चलते किया गया है।

एमजेएसए के दूसरे फेज की होगी कड़ी मॉनिटरिंग
सार्वजनिक निर्माण मंत्री ने बताया कि केबिनेट में मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के दूसरे चरण की प्रगति की समीक्षा भी की गई। उन्होंने बताया कि इस अभियान के जरिए 30 जून तक 4,200 गांवों में जलग्रहण ढांचे बनाने का लक्ष्य है। इसके लिए मुख्यमंत्री ने सभी प्रभारी मंत्रियों और सचिवों को जिलों में प्रवास कर अभियान की कड़ी मॉनिटरिंग करके लक्ष्य की प्राप्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि राजे ने सभी मंत्रियों को सोमवार से बुधवार तक सचिवालय में जरूरी रूप से उपस्थित रहने और तय कार्यक्रम के अनुरूप जन सुनवाई करने के भी निर्देश दिए।

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