राजस्थान विधानसभा में 14 में से 12 विधायकों का निलंबन लिया वापस लेकिन आसन की मर्यादा, सदन की परंपरा और व्यवस्था पर उठे कई सवाल - Jan Manthan : latest news In Hindi , English
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राजस्थान विधानसभा में 14 में से 12 विधायकों का निलंबन लिया वापस लेकिन आसन की मर्यादा, सदन की परंपरा और व्यवस्था पर उठे कई सवाल

सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष में हुई तीखी नोंक- झोंक
विपक्ष ने नहीं दिखाई समझदारी तो सत्तापक्ष दिखा मद में चूर
आसन ने भी बनाया प्रतिष्ठा का मुद्दा, विधायकों को हुड़दंगी कहा
कांग्रेस के खिलाफ भी खुलकर बोले विधानसभा अध्यक्ष
विपक्षी विधायकों को बाहर निकलवाकर किया गया निलंबित
सदन की नेता से चर्चा के बाद 14 में 12 विधायकों का निलंबन लिया वापस
एक साल का निलंबन मान्य किया सिर्फ 1 दिन के लिए
इस नाटकीय घटनाक्रम के बीच धूमिल हुई सदन की मर्यादा

जनमंथन, जयपुर। आसन की मर्यादा, सदन की परंपरा और व्यवस्था पर बुधवार को राजस्थान विधानसभा में प्रश्नचिन्ह लग गए। मामला प्रश्नकाल के दौरान पीएम आवास योजना पर पूरक प्रश्न पूछने की अनुमति का था। विधायक गोविन्दसिंह डोटासरा सवाल पूछना चाहते थे, बटन पहले दबाने की बात कही लेकिन अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने कहा कि आसन ही तय करता है किसे बोलने देना है और किसे नहीं। इस बात पर हंगामा शुरू हुआ तो थमने का नाम नहीं लिया। बाद में बसपा विधायक मनोज न्यांगली और निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल भी इस हंगामे में कूद पड़े, विधायक वैल में आकर हंगामा करने लगे।

हंगामे के बीच सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंक-झोंक हुई और इस बीच विधानसभा अध्यक्ष ने फिर से सदन में अपना आपा खो दिया। विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल के काफी तल्ख तेवर देखने को मिले। आसन से ऐसे शब्द सदन के इतिहास में पहली बार ही सुनने को मिले जिन्होंने आसन की निष्पक्षता और व्यवस्था पर सवाल खडे कर दिए। मेघवाल ने मार्शलों को निर्देश देते हुए कहा कि इन हुड़दंगी कांग्रेसियों को निकाल बाहर करो। उऩ्होंने कहा कि इन हुंड़दंगियों को दिल्ली, यूपी के साथ ही पूरे देश ने नकार दिया है। मेघवाल ने कहा कि राजस्थान की जनता ने भी इन हुड़दंगियों को कूड़ेदान में फैंक दिया है। इसके बाद सभी विधायकों को मार्शलों की मदद से सदन के बाहर धकेला गया और सदन की कार्यवाही 1 घंटे के लिए स्थगित कर दी गई।

इसके बाद भी बिना सदन की कार्यवाही शुरू हुए 1 घंटे और फिर 30 मिनट के लिए सदन को स्थगित किया गया। आखिरकार विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल सदन में पहुंचे और अपना फरमान सुनाकर कांग्रेस के 12 विधायकों सहित बसपा विधायक मनोज न्यांगली और निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल को राजस्थान विधानसभा सदन से 1 साल के लिए निलम्बित कर दिया।

विधानसभा की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तो अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने कहा कि कुछ लोग सदन में हुड़दंग करते हैं, उन्हें विधायक कहना भी विधायक नाम का अपमान है। मेघवाल ने कहा कि यूपी, धौलपुर और अब दिल्ली में हार के बाद कांग्रेस का मनोबल टूट चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि मैं सत्ता पक्ष से फिर मांफी मांगता हूं। प्रतिपक्ष को निर्धारित से ज्यादा समय देता हूं बोलने के लिए ज्यादा समय देता हूं इसके बावजूद प्रतिपक्ष स्पीकर को बदनाम करता रहता है। उन्होंने कहा कि मैं चाहे इस कुर्सी पर रहूं या ना रहूं मुझे इसकी परवाह नहीं लेकिन मैं हुड़दंग बर्दाश्त नहीं करूंगा।

हांलाकि नेता प्रतिपक्ष रामेश्वरलाल डूडी और वरिष्ठ कांग्रेसी विधायक प्रदुम्नसिंह और अन्य चार कांग्रेसी विधायकों ने सदन में आकर विधानसभा अध्यक्ष से निलंबन वापस लेने का आग्रह किया, लेकिन अध्यक्ष नहीं माने। प्रदुम्नसिंह ने कहा- मेरी वरिष्ठता का लिहाज करते हुए तो मुझे सुन लीजिए। अध्यक्ष ने कहा ऐसा किसी किताब में नहीं लिखा हुआ। मौजूदा कांग्रेसी विधायक भी नाराज होकर सदन से वॉक आउट कर गए। बाद में सदन की नेता मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से उन्होंने मुलाकात की। उसके बाद 12 निलंबित कांग्रेसी विधायकों का निलंबन 1 साल की जगह 1 दिन के लिए ही मान्य रखा गया।

इन विधायकों का किया गया था निलंबन
गोविनद डोटासरा, राजेन्द्र यादव, धनश्याम मेहर, धीरज गुर्जर, अशोक चान्दना, सुखराम विश्नोई, रमेश मीणा, श्रवण कुमार, शकुन्तला रावत, हीरालाल दरांगी, मेवाराम, भंवर सिह भाटी, मनोज न्यांगली (बसपा) और निर्दलीय हनुमान बेनीवाल।

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