एसबीसी के लाभार्थियों को मिलेगा ओबीसी का लाभ, गुर्जर असंतुष्ट , आंदोलन करेंगे - Jan Manthan : latest news In Hindi , English
February 6, 2019
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एसबीसी के लाभार्थियों को मिलेगा ओबीसी का लाभ, गुर्जर असंतुष्ट , आंदोलन करेंगे

जनमंथन, जयपुर। एसबीसी (विशेष पिछड़ा वर्ग) आरक्षण मामला सुलझने तक प्रदेश के गुर्जरों समेत पांच जातियों गाडियों लुहार, बंजारा, रेबारी और राइका को ओबीसी आरक्षण कोटे में लाभ दिया जाएगा। इसके साथ ही राजस्थान सरकार एसबीसी कोटे में भी 1 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था के लिए प्रयास करेगी। गुरूवार को शासन सचिवालय जयपुर में एसबीसी आरक्षण मामले में गठित केबिनेट सब कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

इस निर्णय पर सरकार और गुर्जर समाज के प्रतिनिधियों के बीच बंद कमरे में सहमति भी बनी लेकिन गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रवक्ता हिम्मतसिंह ने कहा है कि सरकार उन्हें गुमराह करके सिकंदरा में होने वाली गुर्जर महापंचायत को रोकना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के पास गुर्जरों को देने के लिए कुछ भी नहीं है, ऐसे में गुर्जर महापंचायत होकर रहेगी और आंदोलन यथावत जारी रहेगा।

संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र राठौड की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरुण चतुर्वेदी और सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक जैन समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा बैठक में राजस्थान गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोडी सिंह बैंसला, समिति के प्रवक्ता हिम्मत सिंह और अन्य गुर्जर प्रतिनिधी भी मौजूद रहे।

गौरतलब है कि गुर्जरों को एसबीसी कोटे में 5 फीसदी का आरक्षण देने का वादे को राज्य सरकार ने अंजाम तक पहुंचाने के लिहाज से सितंबर 2015 में विधानसभा में एसबीसी आरक्षण विधेयक पारित करवाया। इसके साथ ही प्रदेश के गरीब ब्राह्मणों को ईबीसी (आर्थिक पिछड़ा वर्ग) कोटे में 14 फीसदी आरक्षण देने का बिल भी सदन में पारित हुआ। इसके साथ ही एसबीसी और ईबीसी (EBC) आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में लागू कराने के लिए विधानसभा में संकल्प पारित किए। दोनों ही संकल्पों को राज्य सरकार ने 9वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केन्द्र को भेज दिया।

इन शासकीय संकल्पों पर सरकार की मुहर लगती उससे पहले ही एसबीसी आरक्षण विधेयक को पहला झटका राजस्थान हाईकोर्ट ने दिया। राजस्थान हाईकोर्ट ने नौ दिसम्बर 2016 को राजस्थान आरक्षण अधिनियम 2015के तहत गुर्जर सहित पांच जातियों को दिये गये पांच फीसदी विशेष पिछड़ा वर्ग आरक्षण को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त कर दिया था। इस आरक्षण के तहत् राजस्थान में एसबीसी कोटे में गुर्जर, राइका, लुहार, बंजारा और रेबारी समाज के युवाओं को शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण दिया गया था। इस मामले में कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं देने के प्रावधान का हवाला देते हुए हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी।

हाईकोर्ट के इस फैसले से उग्र हुए प्रदेश के गुर्जर समाज ने फिर से राजस्थान सरकार को आंदोलन की चेतावनी दे डाली। हालातों को संभालते हुए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गुर्जर प्रतिनिधियों से वार्ता कर हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट चुनौती देने और ढंग से पैरवी करने का आश्वासन दिया। हांलाकि सुप्रीम कोर्ट में भी राज्य सरकार को बडा झटका लगा, शीर्ष कोर्ट ने एसबीसी आरक्षण पर स्टे लगा दिया। इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अध्यादेश के जरिए एसबीसी आरक्षण देने को गलत बताया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसबीसी आरक्षण भविष्य में नहीं दी जानी चाहिए। कोर्ट ने अब तक हो चुकी नियुक्तियां और प्रवेश सुरक्षित रखे जाने की बात भी कही।

इधर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से हताश गुर्जर समाज का गुस्सा राजस्थान सरकार पर फूट रहा था। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के कुछ पदाधिकारियों ने 50 फीसदी आरक्षण व्यवस्था में से ही 5 फीसदी आरक्षण की मांग कर डाली। आखिरकार राजस्थान सरकार ने गुरुवार को केबिनेट सब कमेटी की बैठक में एसबीसी विधेयक को स्टेंड बाई रखते हुए गुर्जर समेत पांचों जातियों को ओबीसी कोटे में लाभ दिए जाने का आश्वासन दिया। लेकिन गुर्जर प्रतिनिधियों ने बैठक में से बाहर निकलते ही कहा कि आंदोलन होकर रहेगा।

-विनीता विजय(एडिटर इन चीफ)

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