बेबीलोन अस्पताल ने जन्मजात विकृति (Anorectal malformation) को दूर करने में रचा इतिहास - Jan Manthan : latest news In Hindi , English
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बेबीलोन अस्पताल ने जन्मजात विकृति (Anorectal malformation) को दूर करने में रचा इतिहास

जनमंथन, जयपुर। नवजात शिशु के जननांगों की जन्मजात विकृति का विशेष मामला राजधानी के बेबीलोन अस्पताल में सामने आया है। खास बात यह रही कि बेबीलोन अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों ने इस जटिल विकृति को दूर करने में राजस्थान में इतिहास रचा है। दरअसल अस्पताल में भर्ती हुए मादा शिशु का गुदाद्वार नहीं बना हुआ था और गुदाशय, योनि से बेहद संकरी नली द्वारा जुड़ा हुआ था। इसके चलते मल योनि से ही बाहर नहीं आ रहा था। यह जन्मजात विकृति पुरुष और स्त्री शिशु में बराबर अनुपात में मिलती है यह सामान्य जनसंख्या में 5000 में से एक के अनुपात में नवजात शिशुओं में मिलती है। राजस्थान में यह विकृति अन्य राज्यों से ज्यादा पाई जाती हैं।

सामान्यतः इस तरह की विकृति को ठीक करने के लिए तीन ऑपरेशन अलग-अलग आयु में किए जाते हैं। पहला ऑपरेशन में मल के आंतों पर अत्यधिक दबाव को कम करने के लिए किया जाता है। इसमें आंतों में छेद करके एक रास्ता बनाया जता है जिसमें एक बार पेट फूलने की इमरजेंसी से निजात मिल जाती है। इसके अलावा 8 महीने बाद जब बच्चा कम से कम 6 से 7 किलो का हो जाता है तब दूसरा ऑपरेशन होता है जिसमें गुदाशय और योनि से जुड़ी हुई सकरी नली को अलग किया जाता है।

तीसरा और अंतिम ऑपरेशन में आंतों से निकाले गए रास्ते (colostomy) को बंद किया जाता है। यह ऑपरेशन 1 या 2 साल की आयु में किया जाता है। इस जटिल प्रक्रिया में आतों से निकाले गए रास्ते से मल आता रहता है और संक्रमण भी होने का खतरा रहता है। इसके लिए परिजनों को बडी परेशानी उठानी पड़ती है। तीन ऑपरेशन्स का खर्च और मानसिक दबाव का सामना भी करना पड़ता है।

बेबी लोन अस्पताल जयपुर में इस जननांगों की जन्मजात विकृति (Anorectal malformation) को एक ही ऑपरेशन द्वारा ठीक किया गया है। इसमें योनि और गुदाशय के बीच के छोटी से स्थान से अत्यधिक सूक्ष्म शल्य प्रक्रिया द्वारा गुदाद्वार बनाया गया और संकरी नली द्वारा जुड़ाव को अलग किया गया।

प्रदेश में इस तरह की शल्य चिकित्सा का पहला मामला है यह ऑपरेशन बेबीलोन अस्पताल के वरिष्ठ शिशु शल्य चिकित्सक डॉक्टर राम बाबू गोयल द्वारा निश्चेतन विशेषज्ञ डॉक्टर मुकेश बड़ाया, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर धनन्जय कुमार, डॉक्टर चंचल सिंघल की सघन देखरेख में किया गया है।

मादा शिशु में एनॉरेक्टल मैलफॉर्मेशन विकृति का ऑपरेशन करते चिकित्सक
मादा शिशु में एनॉरेक्टल मैलफॉर्मेशन विकृति का ऑपरेशन करते चिकित्सक

अस्पताल निदेशक डॉक्टर धनंजय कुमार ने बताया कि शिशु के मल द्वार और योनि द्वार सामान्य बच्चे की तरह काम कर रहे हैं शिशु के परिजनों ने अस्पताल के ऑपरेशन में शामिल चिकित्सकों का आपने खुशी प्रकट करते हुए आभार जताया है

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