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February 6, 2019
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जयपुर जिले के कुंजेश ने रचा इतिहास, देश में मेमोरी की बादशाहत पर किया कब्जा

जयपुर। जयपुर जिले के बावड़ी खोरा गांव के कुंजेश शर्मा ने देश में याददाश्ती (memory) की बादशाहत पर कब्जा कर लिया है। जी हां 7 साल से याद करने की वैदिक पद्धतियों पर गहन रिसर्च कर रहे कुंजेश ने इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। कुंजेश ने मेमोरी के बडे-बडे दिग्गजों को पीछे छोडते हुए यह इतिहास रचा है।

कुंजेश ने हाल ही में पाई (π) की असीमित डिजिट्स का डाटा याद करके यह साबित कर दिया कि इंसानी मस्तिष्क में असीमित शक्ति छुपी हैं। उन्होंने
एक मिनट में 270 डिजिट्स याद करके और तेज गति से सुनाकर इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया।

कुंजेश का कहना है कि हजारों सालों में तेजी से बदले परिवेश के चलते भारतीय वैदिक पद्धतियों से हम दूर हो गए हैं। उन्होंने बताया कि साढे 3 हजार साल पहले शिष्य किताबों की बजाय गुरु मुख से ही ज्ञान प्राप्त करते थे और जीवन में कभी भूलते नहीं थे। कुंजेश का कहना है कि वैदिक कठिन श्लोकों को शिष्य जब भी गुरु चाहते थे तब उसी क्रम में सुना देते थे।

कुंजेश ने कहा कि याद करने के अचूक तरीकों के लिए अद्भुत शक्तियों से लेस हमारे मस्तिष्क की भाषा को पढना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि मस्तिष्क (BRAIN) की इस भाषा को पढने में हमारे ऋषि- मुनियों को महारथ हासिल थी। कुंजेश ने यह भी कहना है कि पुरातन वैदिक पद्धतियों में ही मस्तिष्क की इस भाषा (MEMORY LANGUAGE) के राज छुपे हैं। उन्होंने बताया कि अथक प्रयासों के बाद उनकी मेमोरी रिसर्च टीम ने उन्हीं पुरानी वैदिक पद्धतियों को खोज निकाला है। सुमन शर्मा, कमलेश चंद्रा, आरपी सिंह, ललित लाटा, मंजुला कौर और मनोज शर्मा कुंजेश की मेमोरी रिसर्च टीम के सदस्य हैं।

मेमोरी मास्टर कुंजेश अपनी इस खोज से अब तक करीब 5000 विद्यार्थियों को लाभान्वित कर चुके हैं। विद्यार्थियों ने भी याद करने की वैदिक तकनीक से याद कर सबको चौंकाया है। अब कुंजेश अमेरिका में हो रहे वर्ल्ड मेमोरी चैंपियनशिप में हिस्सा लेने जा रहे हैं। इसके अलावा वे वैदिक पद्धतियों की याद करने की तकनीकों के जरिए राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के विजन को लेकर रिसर्च कर रहे हैं। कुंजेंश का कहना है कि वैदिक पद्धतियों से विश्व को अवगत कराकर वे भारत को विश्व गुरु एक बार फिर से साबित कर दें, यही उनका लक्ष्य है।

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