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February 6, 2019
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प्रदेश में रिफाइनरी का रास्ता साफ, HPCL के साथ 1 माह में होगा नया करार

जयपुर। सत्ता परिवर्तन में लंबित हुई राजस्थान की बाडमेर रिफाइनरी का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गुरुवार को इस संबंध में राजस्थान विधानसभा में मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक महिने में एचपीसीएल (HPCL) के साथ ही एक नया एमओयू इस संबंध में किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह बात राजस्थान विधानसभा में विनियोग विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब पेश करते हुए कही।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बताया कि कांग्रेस रिफाइनरी के मुद्दे पर प्रदेश की जनता को गुमराह कर
रही है। उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार ने बाड़मेर में रिफाइनरी के लिए बिना सोच-विचार किए एमओयू किये थे जिससे राज्य सरकार पर 56 हजार 40 करोड़ रुपये का वित्तीय भार पड़ता। राजे ने बताया कि पिछले एमओयू प्रस्ताव को देखते हुए सरकार को 15 साल तक सालाना 3 हजार 736 करोड़ रुपये ब्याज मुक्त ऋण के रूप में देना पड़ता। मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके रि-नेगोशिएशन से अब यह राशि सिर्फ 1 हजार 123 करोड़ रुपये सालाना रह गई है।

राजे ने बताया कि 15 साल में ब्याज मुक्त ऋण के रूप में दी जाने वाली राशि अब 56 हजार 40 करोड़ रुपये से घटकर 16 हजार 845 करोड़ रुपये रह गई है। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस
सरकार ने रिफाइनरी में 26 फीसदी इक्विटी के रूप में 3871 करोड़ देना तय किया था। नये प्रस्ताव में यह राशि भी घटकर 3 हजार 738 करोड़ रह गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे प्रयासों से ही एचपीसीएल (HPCL) को अपने पुराने प्रस्ताव को बदलना पड़ा। उन्होंने कहा कि हमारी ओर से किए गए रि-नेगोशिएशन का ही परिणाम है कि राज्य पर रिफाइनरी की स्थापना से पड़ने वाला वित्तीय भार करीब दो-तिहाई कम होकर 20 हजार 583 करोड़ रुपये रह गया है। उन्होंने कहा कि आगामी एक माह में एचपीसीएल के नये प्रस्ताव के मुताबिक रिफाइनरी के लिए एमओयू होगा।

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