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राजमहल का मुद्दा गहराया सदन में, पूर्व रियासतों की संपत्ति हड़पने के लगे वसुंधरा पर सीधे आरोप

जयपुर। राजमहल मामले में विवाद अब विधानसभा के सदन में गूंजने लगा है। सत्तापक्ष पर भी इस मामले में सवालों की बौछार रोक नहीं पा रहा है। गुरुवार को भी सदन की कार्यवाही के दौरान इस मुद्दे को निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल ने उठाया। बेनीवाल ने पूर्व रियासत और सरकार के बीच हुए समझौते की याद दिलाते हुए सदन को कहा कि समझौते के मुताबिक ना तो राजघराना और ना ही सरकार कोर्ट में जा सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे में राज्य सरकार ने राजमहल पैलेस होटल पर कैसे दावा किया है, उन्होंने कहा कि अगर दोनों ही पक्षों में टकराव है तो राजमहल पैलेस को सार्वजनिक संपत्ति घोषित किया जाए।

इसी बीच भाजपा के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी भी कूद पड़े। तिवाडी ने कहा कि यह राजदरबार का नहीं राजस्थान का मामला है। उन्होंने कहा कि न्यायालय में चल रहे मामले पर सदन में विचार नहीं हो सकता लेकिन न्यायालय में लगे मामले के दौरान प्रशासकीय कार्रवाई क्यों की गई। साथ ही तिवाडी ने यह भी पूछा कि कार्यवाही सही थी तो उसे वापस क्यों लिया गया, और रात दो बजे कमेटी बनाकर कार्रवाई क्यों की गई।

इस दौरान जवाब नहीं देने से झल्लाए विधायक बेनीवाल ने राजमहल पैलेस पर सरकार की कार्यवाही को थूक कर चाटने की संज्ञा दे डाली। बेनीवाल के ऐसा बोलते ही सदन में जोरदार हंगामा हुआ और सरकारी उप मुख्य सचेतक मदन राठौड़ ने सही शब्दावली के उपयोग की नसीहत दी। आखिर में राजमहल पर किया गया सवाल पूर्व रियासतों की संपत्तियों तक पहुंच गया। बसपा विधायक मनोज न्यांगली ने राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर आरोप लगाए कि वे पूर्व रियासतों की संपत्तियों को हड़पना चाहती हैं। न्यांगली ने कहा कि राजपरिवारों की संपत्ति को हड़पने नहीं देंगे।

इस मामले में संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने पहले नियम 37 की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि कोर्ट में विचाराधीन मामले पर सदन में चर्चा नहीं की जा सकती है। इसके अलावा राठौड ने कहा कि एडीजे फास्ट ट्रैक के फैसले की अनुपालना में मामला अभी हाईकोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने यह भी बताया कि इससे जुड़े 7 मामले हाईकोर्ट में है तो 18 मामले अलग-अलग न्यायालयों में विचाराधीन चल रहे हैं।

चर्चा के दौरान बसपा के विधायक मनोज कुमार न्यांगली ने मुख्यमंत्री पर जब रियासतों की जमीन हड़पने का आरोप लगाया तो सत्तापक्ष के विधायक उत्तेजित हो गए औऱ हंगामा और ज्यादा बढ़ गया। इस बीच राजेन्द्र ने नियम पुस्तिका लहराते हुए, नियमों के उल्लंघन की दुहाई देते रहे। भाजपा के विधायक घनश्याम तिवाड़ी भी पुस्तिका लहराते इस दौरान चर्चा कराने की बात कहने लगे।

इस दौरान विधायक तिवाड़ी और राजेन्द्र राठौड के बीच तीखी नोंक-झोंक भी हो गई। संसदीय कार्यमंत्री राजेन्द्र राठौड ने बाद में चर्चा के दौरान स्वीकार किया कि पूर्व रियासतों की सरकारी मुद्रणालय की प्रति उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही यह भी स्वीकार कर लिया कि इन्वेन्ट्री के दस्तावेज भी हस्ताक्षरित नहीं हैं। सदन में तीखी नोंकझोंक और असंसदीय भाषा का भी उपयोग हुआ। हांलाकि अंत में विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने इस हिस्से को सदन की कार्यवाही से हटाने के निर्देश दे दिए।

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