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आगामी तीन महिनों में वाहिनी की पहुंच प्रत्येक बूथ तक होगी — अखिलेश तिवाड़ी

बांसवाड़ा।
दीनदयाल वाहिनी के प्रदेश सचिव अखिलेश तिवाड़ी ने कहा कि अच्छे लोकतंत्र और बुरे लोकतंत्र में यही एक फर्क है कि कौन मानव स्वतंत्रता में कितनी वृद्धि करता है। इस दौरान उन्होंने उपस्थित युवाओं से प्रश्न किया कि जनप्रतिनिधि किसके प्रति जवाबदेह होना चाहिए जनता के प्रति या पार्टी बोसेज के प्रति। तिवाड़ी दीनदयाल वाहिनी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के साथ ही संगठन विस्तार के लिये वांगड दौरे पर आये हुए थे। वे बांसवाड़ा में आयोजित कार्यशाला लोकतंत्र रक्षणाय धर्मचक्र प्रवर्तनाय को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने दीनदयाल वाहिनी के संविधान से अवगत कराते हुए वाहिनी निर्माण के लिये संगठनात्मक ढांचे से भी कार्यकर्ताओं को रूबरू कराया। तिवाड़ी ने कहा कि आने वाले तीन महिनों में दीनदयाल वाहिनी बांसवाड़ा जिले में बूथ स्तर तक पहुंचेगी। यह व्याख्यान सोमवार को वांगड़ सोसायटी परतापुर में आयोजित किया गया था।

अधिकारों का दुरूपयोग कर रहे हैं जनप्रतिनिधि

लोकतंत्र की रक्षा और धर्मचक्र के प्रवर्तन के उद्देश्य से आयोजित इस व्याख्यान में अखिलेश तिवाड़ी ने कहा कि हम अपने अधिकार जनप्रतिनिधियों को समर्पित करते जाते हैं जिसका फायदा उठाकर ये जन प्रतिनिधि पार्टी के आकाओं को वे अधिकार सौंप देते हैं जिन्हें ये आका कॉरपोरेट जागीरदारों के यहां गिरवी रख देते हैं। तिवाड़ी ने कहा कि अगर दीनदयाल वाहिनी राजनीतिक दल का रूप लेती है तो यह कार्यकर्ताओं का, कार्यकर्ताओं के लिए कार्यकर्ताओं द्वारा बनाया गया संगठन होगा। जिसमें कोई राजनीतिक आका कार्यकर्ताओं के अधिकारों का हनन नहीं कर पायेगा और आंतरिक लोकतंत्र से भारत के लोकतंत्र को मजबूती मिलेगी।

युवा चाहे तो कायम कर सकता है नई राजनीतिक व्यवस्था

कार्यक्रम में तिवाड़ी ने उपस्थित सभी युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि हम हमारे भविष्य की संभावनाओं से संबंध रखते हैं न कि भूतकाल से। इसका मतलब ये हुआ कि हमें अपने वर्तमान का आंकलन अपने भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर करना होगा। उन्होंने कहा कि इसी कारण हमें अपने राजनेताओं से भी यह सवाल करना होगा कि मेरे भविष्य की संभावनाओं को खत्म करने का अधिकार उसे किसने दिया। अगर युवा इस महत्वपूर्ण विषय पर चलने का प्रयास करेगा तो न केवल भारत को बल्कि पूरी दूनिया को नये प्रकार का दर्शन, साहित्य, संगीत और राजनीतिक व आध्यात्मिक व्यवस्था मिलेगी। तिवाड़ी ने आगे कहा कि मगर यह क्षमता अभी दबी पड़ी है और इसका कारण भारतीय राजनीतिक व्यवस्था है। क्योंकि भारत की राजनीति ने हमको ऐसा जकड़ रखा है कि हम उससे अलग कुछ सोच नहीं पाते।

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