November 17, 2018
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श्री कृष्ण ने रखी थी विश्व में हिन्दू धर्म की नींव,त्रिदेवों ने की थी सहायता

जनमंथन, हरिद्वार (धर्म)। आखिर हिन्दू कौन है ? देवी-देवताओं की पूजा करने वाला या फिर सनातन धर्म का पालन करने वाला? अब सवाल उठता है, बात यहां हिन्दू की कर रहे हैं तो फिर सनानत धर्म क्या है। दरअसल सनातन धर्म जीवनशैली और धर्म की एक व्यवहारिक धारणा है। सनातन धर्म का पालन करने वाले ही आज हिन्दू कहलाने लगे हैं।

शायद ही किसी को मालूम हो कि भगवान श्री कृष्ण ने ही सनातन धर्म की नींव रखी थी। इससे पहले विश्व में केवल वैदिक धर्म ही था। जो वेदों में लिखा है उसे ही मूल धर्म कहा गया। लेकिन फिर इस धर्म का पतन होने लगा। तत्कालीन संतों ने इस दौरान वैदिक धर्म तथ्यों को मनगढंत रुप से लोगों तक पहुंचाना शुरु कर दिया। और इसी के चलते वैदिक धर्म के अनुयायी कई जातियों और समाजों में बंट गए।

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जब जातिवाद का जन्म हुआ तो सामाजिक अराजकता का माहौल पनपने लगा। ईश्वरीय आस्था से लोग परे होने लगे जो वेद, वेदांत और परमात्मा में कोई आस्था-विश्वास नहीं रखते थे। इसमें से एक वर्ग स्वयं को वैदिक धर्म का अनुयायी और आर्य कहता था तो दूसरा जादू-टोने में विश्वास रखने वाला और प्रकृति तत्वों की पूजा करने वाला था। दोनों ही वर्ग भ्रम.और भटकाव में जी रहे थे क्योंकि असल में उनका वैदिक धर्म से कोई वास्ता नहीं था।

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श्रीकृष्ण के काल में ऐसे 72 से ज्यादा अवैदिक समुदाय दुनिया में मौजूद थे। ऐसे में श्रीकृष्ण ने सभी को एक किया और फिर से वैदिक सनातन धर्म की स्थापना की। जिसे बाद में हिन्दू धर्म कहा जाने लगा। ध्रर्म विश्लेषकों का मानना है कि सनातन धर्म को और ज्यादा मजबूत करने के लिए मनु ने की थी।

ब्रह्मा, विष्णु, महेश सहित अग्नि, आदित्य, वायु और अंगिरा ने इस धर्म की स्थापना की।
सबसे पहले विष्णु से ब्रह्मा, ब्रह्मा से 11 रुद्र, 11 प्रजापतियों और स्वायंभुव मनु के माध्यम से इस धर्म की स्थापना हुई। इसके बाद इस धा‍र्मिक ज्ञान की शिव के सात शिष्यों से अलग-अलग शाखाओं का निर्माण हुआ। वेद और मनु सभी धर्मों का मूल है। मनु के बाद कई संदेशवाहक आते गए और इस ज्ञान को अपने-अपने तरीके से लोगों तक पहुंचाया। करीब 90 हजार से भी ज्यादा सालों की परंपरा से यह ज्ञान श्रीकृष्ण और गौतम बुद्ध तक पहुंचा। और फिर हिन्दू धर्म विश्व में हिन्दू धर्म स्थापित हुआ। हांलाकि आज की बात करें तो हिन्दू धर्म में भी कई ध्रर्म भी कई जातियों में बंट गया है। हिन्दू धर्म के हर संत का एक अलग धर्म और अलग मत है।

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पूरे तथ्यों को समझा जाए तो मिलेगा कि जब विश्व में जब धर्म की दुर्गति होने लगी तो भगवान नारायण ने ही श्रीकृ्ष्ण के रुप में जन्म लेकर धर्म की रक्षा की और उसे सनातन या हिन्दू नाम दिया। इसलिए कहा जाता है।

‘यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानम सृज्याहम।
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम।
धर्म संस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे ॥’

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